महावीर मंदिर के पूर्व महंत भगवान दास ने सचिव किशोर कुणाल पर लगाया गंभीर आरोप…..

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बिहार की राजधानी पटना में महावीर मंदिर का स्थान देशभर में हनुमान जी को समर्पित पवित्र हिन्दू मंदिरों में से एक है. इस मंदिर की गिनती उत्तर भारत के उन पवित्र मंदिरों में होती है जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं. और मंदिर में विराजित संकट मोचन की प्रतिमा भक्तों के ह्रदय में एक विशेष स्थान रखती है .बिहार की राजधानी के पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के बीच स्थित यह महावीर मंदिर को मनोकामना मंदिर कहा जाता है. जिसकी छटा मंदिर स्थित ओवर ब्रीज से देखते ही बनती है,

 

गौरतलब है कि हनुमानगढ़ी अयोध्या ने पटना के महावीर मंदीर पर अपना मालिकाना हक़ होने का दावा ठोककर एक विवाद शुरू कर दिया है. इसके मालिकाना हक़ को लेकर हनुमानगढ़ी अयोध्या में जगहजगह हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, और उस हस्ताक्षर अभियान को आधार बनाकर बिहार धार्मिक न्यास पर्षद को पत्र भेजकर मंदिर पर अपने स्वामित्व का दावा किया है।

पटना के प्रसिद्द हनुमान मंदिर पर अधिकार को लेकर विवाद गहराता ही जा रहा है. हनुमानगढ़ी अयोध्या का कहना है कि रामनंदीय वैरागी बालानंद जी 300 साल पहले पटना जंक्शन उतरने के बाद उन्होंने यहाँ महावीर मंदिर की स्थापना की थी. वहीँ मंदिर के सचिव किशोर कुनाल कहते हैं की इस बात के कोई प्रमाण नही है, अगर इसके कोई प्रमाण हैं तो प्रस्तुत करें उसके बाद मैं खुद बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद में जाकर कमिटी में परिवर्तन के लिए लिखूंगा.

मंदिर के सचिव किशोर कुणाल पर लगाये गंभीर आरोप

इसके साथ ही मामला यही पर नही रुका हनुमानगढ़ी के महंत प्रेमदास ने महावीर मंदिर के सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि किशोर कुनाल आईपीएस अधिकारी हैं. पटना के एसपी रहते हुए महावीर मदिर को अपने अधिकार में ले लिया था. उस समय मंदिर के पुजारी और महंत की परंपरा थी और उस समय रामगोपाल दास मंदिर के महंत और पुजारी हुआ करते थे जिन्हें गलत आरोप में जेल भिजवा दिया गया था. उसके बाद से किशोर कुणाल मंदिर के सर्वेसर्वा बन गए. और महंत और पुजारी की परंपरा ख़त्म कर दी. भले हाईकोर्ट ने बाद में रामगोपाल दास को बाइज्जत बरी कर दिया था.

हनुमानगढ़ी के मौजूदा महंत भगवानदास का कहना है कि महावीर मंदिर में हमेशा से महंत की परम्परा रही है लेकिन किशोर कुणाल ने यहाँ परम्परा ख़तम कर दी लेकिन फिर भी महावीर मंदिर में हनुमानगढ़ी के 8-9 पुजारी वहां लगातार रहें हैं. महंत भगवानदास का कहना है कि मंदिर में विराजमान संकटमोचन की प्रतिमा स्वामी बालानंद जी के काल से ही है, और शुरू में महंत भगवानदास ही महंत के तौर पर महावीर मंदिर में रखे गए थे. इसलिए प्रथा के अनुसार पंच रामानंदी अखाडा हनुमानगढ़ी अखाडा हनुमानगढ़ी अयोध्या से ही महावीर मंदिर का संचालन होता था.

भगवान दास के लगाये आरोपों पर मंदिर के सचिव किशोर कुणाल का बयान

वहीँ इस विवाद को लेकर आचार्य किशोर कुणाल ने कहा हनुमानगढ़ी की नियमावली में वैसे तो सातआठ स्थानों की मंदिरों का ज़िक्र है लेकिन महावीर मंदिर पटना का ज़िक्र कहीं नही किया गया है. और बात रही एसएसपी रहने की तो 15 अप्रैल 1983 से 14 जुलाई 1984 तक मैं पटना एसएसपी रहा, इसके बाद 18 अगस्त 1984 से बिहार कैडर से मेरा सम्बन्ध ख़त्म हो गया.

उन्होंने भगवान दास द्वारा मंदिर पर कब्ज़ा के लगाये गए आरोप पर कहा कि मैंने 30 नवम्बर 1983 से 4 मार्च 1985 तक मंदिर खड़ा कर महंत भगवानदास और उनके शिष्य रामगोपालदास को सौप दिया. परन्तु 1987 में वैशाली में एक विधवा और उसके बच्चे की हत्या के आरोप में रामगोपाल दास को वैशाली पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. और उसी समय 1987 में नए ट्रस्ट श्री महावीर स्थान न्यास समिति का गठन हुआ, जिसे लेकर वोलोग हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गए. लेकिन हार गए.

मंदिर की प्रॉपर्टी को लेकर हो सकता है ये सारा विवाद

पटना का महावीर मंदिर देश के उन धार्मिक स्थान में शामिल है जहाँ सबसे अधिक चढ़ावा चढ़ता है, मंदिर ट्रस्ट का सालाना बजट लगभग डेढ़ अरब का है सिर्फ मंदिर की आय 18 से 20 करोड़ है, इसमें लगभग 15 करोड़ रूपये अलग अलग परियोजनायों के लिए खर्च किये जाते हैं. इन सालों में मंदिर की लोकप्रियता जिस तरह से बढ़ी है उससे कयास लगाये जा रहें हैं कि यह पूरी लड़ाई मंदिर के प्रॉपर्टी को लेकर है

 

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