जानिए, दीपावली के दिन लोग क्यों खेलते हैं जुआ?

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भारत त्योहारों वाला देश है यहां हर महीने कोई न कोई एक त्योहार होते रहता है. हर त्योहार का अपना एक महत्व होता है. उसकी एक अपनी लोककथा, लोककहानी होती है, कोई भी त्योहार हो वह आम जन-जीवन से जुड़ा होता है. त्योहार हमें एक सामाजिक ढांचे में बांध कर रखता है. इन्हीं त्योहारों में कुछ ऐसे भी त्योहार है जिसे हम सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्षों के हिसाब से देख सकते है.


दीपावली के दिन यह मान्यता है कि लोग रात में जुआ खेलते हैं. अब चाहे वे तास के पत्तों के साथ खेले, लुडो के साथ खेले या पासे के साथ खेले. इस दिन जुआ में हारना और जीतना दोनों को लोग शुभ मानते है. दीपावली के दिन परिवार के साथ जुआ खेलने का विशेष महत्व है इस दिन जुआ खेलने का मुख्य लक्ष्य होता है वर्ष भर के भाग्य की परीक्षा करना.

दीपावली के दिन जुआ खेलने के पिछे दंतकथा यह है कि इस दिन भगवान शिव और पार्वती ने भी जुआ खेला था, तभी से ये प्रथा दीपावली के साथ जुड़ गई है. हालांकि शिव व पार्वती द्वारा दीपावली पर जुआ खेलने का ठोस तथ्य किसी ग्रंथ में नहीं मिलता है. जुआ एक ऐसा खेल है जिससे इंसान तो क्या भगवान को भी कई बार भयंकर मुसीबतों का सामना करना पड़ा है. जुआ, सामाजिक बुराई होकर भी भारतीय मानस में गहरी पैठ बनाए हुए है.

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