इधर नीतीश होटल मौर्या में विकास की गाथा गा रहे थें, उधर इलाज के अभाव में गरीब की बेटी दम तोड़ रही थी !

सरकारों को कह देना चाहिए कि जनता और हमारा संबंध वोटों का है. बिना पैसे के बेटी मर जाए या भात भात बोलते बोलते दम टूट जाए. हम तो ऐश करेंगें. आपकी सेवा करने का भाषण भी देंगें तो फाइव स्टार होटलों में. लोग मरें तो मर जाएं हम तो लड़ेंगें अपने बंगले के लिए. देश ने खबर देखी कि किसी तरह झारखंड में भात भात कहते एक बेटी मर गई.

कल जब बिहार के सीएम नीतीश कुमार राजधानी पटना के होटल मौर्या में एक निजी चैनल के प्रोग्राम में बिहार के विकास की गाथा गा रहे थें उसी वक्त जमुई का एक पिता अपनी आंखों के सामने अपनी बेटी को मरता हुआ देख रहा था.

जमुई जिले के कजरा निवासी रामबालक की बेटी की तबियत खराब थी. पटना एम्स आए थें बेटी के इलाज के लिए. अभागा रामबालक तड़पता रहा, डाॅक्टरों के सामने बिलखता रहा, किसी ने एक न सुनी. न पर्चा कटा और नहीं किसी मेडिकल स्टाफ ने उसकी सुध ली. अंततः रामबालक की बेटी ने वहीं तड़प तड़प कर जान दे दिया.

बेटी की मौत का गम और भी बढ़ गया जब एंबुलेंस की जगह कंधे पर लाश ढोकर ले जाना पड़ा. जानिए क्या कहते हैं एम्स के डाॅक्टर.
एम्स निदेशक डाॅ प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि जमुई से इलाज  के लिए बच्ची आयी थी, मगर उसका पुर्जा नहीं कटा था न ही किसी डाॅक्टर ने  देखा था. उन्होंने कहा मैं स्वयं ओपीडी में तैनात सभी डाॅक्टरों  समेत गार्ड से गहन  पूछताछ की. कोई भी  ऐसी बात नहीं कही एम्स परिसर में चार एंबुलेंस  हैं.

डाॅक्टर वो तो भला हो भगवान का कि केंद्र और बिहार दोनांे जगह एक हीं गठबंधन की सरकारें हैं नहीं तो तुरंत राज्य और केंद्र का फुटबाॅल मैच शुरु हो जाता.

 

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