घर का वास्तु दोष ऐसे पहचाने

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कहा जाता है की वास्तुशास्त्र हमारे जीवन को काफी प्रभावित करता हैं। यह देखने में साधारण-सी बात मालूम पड़ती है लेकिन इसका प्रभाव साधारण नहीं होता। गौर करने पर विभिन्न परेशानियों की वजह वास्तु होती है और इसे सुव्यवस्थित होने से जो प्रभाव जीवन पर पड़ता है उससे जीवन में शांति बनी रहती है। कुछ ऐसे वास्तुदोषों को बताया जा रहा है जो अक्सर ही भवन निर्माण में पाए जाते हैं.

* भवन का उत्तर-पूर्व यानि ईशान कोण गन्दा या किसी सामान से भरा होता है तो इससे घर के लोंगो में नास्तिकता की भावना बढ़ती है। इसके लिए उस स्थान को साफ करके सरस्वती यंत्र सिद्ध स्थापित कर देना चाहिए।

* भवन की पूर्व दिशा यदि दक्षिण और पश्चिम से ऊँचा उठा हो अथवा किसी प्रकार से दोषपूर्ण हो तो परिवार में वंश वृद्धि रुकने की सम्भावना बनती है। इसके लिए गोपाल यंत्र को पूर्व दिशा में सिद्ध करके स्थापित करें, रोज उसकी पूजा करें और उत्तर-पूर्व दिशा को खुला और साफ रखें।

 

* यदि आपके घर का पश्चिम दिशा दोषपूर्ण होता है तो अक्सर ही आपकी गाड़ी वगैरह ख़राब हो जाएगी और आपके कर्मचारी आपकी आज्ञा का पालन नहीं करेंगे। ऐसे में आप पश्चिम दिशा में शनि या मत्स्य यंत्र को सिद्ध करके रखें।

* भवन का दक्षिण-पूर्व यानि की आग्नेय कोण दोषपूर्ण होती है तब आपके घर में सदस्यों के बीच कलह और क्लेश बढ़ता ही जायेगा और घर में आग लगने की घटना भी सामने आ सकती हैं, इससे बचाव के लिए शुक्ल पक्ष के मंगलवार को इस दिशा का वास्तु दोष निवारण यंत्र सिद्ध करके स्थापित कर देना चहिये।

* घर में ब्रह्मस्थल यदि भरा हुआ, गन्दा और दोषपूर्ण होता है तब बने हुए काम बिगड़ते नजर आते हैं। इसके बचाव के लिए ब्रह्मस्थल पर तुलसी के पौधा को रखना चाहिए और उसमें दीप जलाना और जल चढ़ाना चहिये।

* दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य दिशा खुला हो और धंसा हुआ हो तो घर में चोरी की घटना घटित होती है। इससे बचाव के लिए इस दिशा को बंद कर दीजिए और और राहु यंत्र को सिद्ध करके स्थापित दें।

* यदि उत्तर दिशा दक्षिण दिशा से अधिक ऊँचा हो तो परिवार के सदस्यों को आलस आता है। ऐसे में उत्तर दिशा को साफ़ रखे और श्री यंत्र की स्थापना करें।

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