क्या बेगूसराय चुनावी समीकरण में भाजपा जीत हासिल कर पायेगी ?

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भले ही गिरिराज सिंह अकेले ही मैदान में खड़े हैं लेकिन उनके आस-पास कोई भी विरोधी नहीं दिख रहा है। हम ऐसा किसलिए बोल रहे हैं, इसका वजह जानने के लिए लिए हम आपको पिछले चुनाव का हाल बताते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में लगभग 4.28 लाख वोट भोला सिंह को हासिल हुए थे, राजद के तनवीर हसन को 3.70 लाख वोट प्राप्त हुए थे, वहीँ भाकपा के राजेंद्र प्रसाद सिंह को 1.92 लाख वोट प्राप्त करके तीसरे स्थान पर आये थे। अगर इन आंकड़ों पर गौर किया जाए तो कन्हैया कुमार के पास सिर्फ 2 लाख मतदाता हैं। कन्हैया कुमार को सफलता हासिल करनी है तो उसे 4 वोट चाहिए और कहीं से मिलता हुआ नज़र नहीं आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि राजद के तनवीर हसन बेगूसराय सीट से मजबूत प्रत्याशी माने जाते हैं और इनका वोट 3.70 जिसमें 1 लाख वोट ही कन्हैया अपने तरफ कर पाएंगे।

अगर गिरिराज सिंह की बात की जाए तो आज भी फॉरवर्ड वोट उनकी राजनीतिक पार्टी यानी भाजपा को ही मिलता है, और इसके अलावा कुशवाहा, कुर्मी और दूसरे समाजों का भी समर्थन प्राप्त हो सकता है। भूमिहार वोटरों की तादाद बेगुसराई लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा है यानी लगभग पौने पांच लाख है। इस सीट पर मुसलमान, कुशवाहा की संख्या लगभग 2.5 लाख, कुर्मी की संख्या लगभग 2 लाख, और तकरीवन 1.5 लाख की संख्या में यादव वोटर हैं। बेगूसराय हमेशा से वामपंथियों के लिए उर्वर रही है और भूमिहार समाज के नेता वामपंथी आंदोलन के सभी लोगों में आगे रहे हैं। भाकपा के योगेंद्र शर्मा ने 1967 के लोकसभा चुनाव में यहाँ से जीत दर्ज़ किया था। आपको बता दें की विवादों में रहे जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार का भाकपा के तरफ मैदान में उतरने के बाद ये चुनावी लड़ाई त्रिकोणीय हो चुकी है।

पिछले चुनावों में भाजपा और जदयू का भूमिहार समाज ने समर्थन किया था। राजग की तरफ से वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में जदयू के राजीव रंजन, वर्ष 2009 में डॉक्टर मोनजीर हसन, भाजपा के भोला सिंह वर्ष 2014 में जीत हासिल किये थे। आपको बता दें राजीव रंजन और भोला सिंह दोनों ही भूमिहार थे।

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