गोवा विधानसभा चुनाव 2022: गोवा में वैलेंटाइन्स डे के मौके पर डाले जाएंगे वोट, 40 सीटों पर होगा विधानसभा चुनाव

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कोरोना के नए वैरिएंट के बीच पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों का ऐलान कर दिया गया है जिसके तहत ही इस साल गोवा में भी वोट चुनाव होने वाला है, निर्वाचन आयोग की तरफ से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार केवल एक ही चरण में वोटिंग का काम पूरा कर लिया जायेगा क्योँकि गोवा में विधानसभा सीटों की संख्या भी महज़ 40 ही है ऐसे में इस बार वैलेंटाइन्स डे के मौके पर यानी की 14 फरवरी को वोटिंग का काम किया जायेगा। इसके लिए 21 जनवरी को अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। 28 जनवरी तक नामांकन होंगे और नामांकन की जांच 29 जनवरी को होगी। 31 जनवरी तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे। वही परिनाम 10 मार्च को आएंगे.

पिछली बार यहां चार फरवरी को मतदान हुआ था औरवोटों की गिनती 11 मार्च 2017 को हुई थी फिलहाल गोवा में बीजेपी की सरकार है और  प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री हैं उसके पास अपने 25 विधायक हैं और एक निर्दलीय का समर्थन है. हाल ही में बीजेपी के दो विधायकों कार्लोज अल्मेडिया और एलिना सालदना ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.

हालाँकि गोवा के चुनावी समीकरण की बात करे तो गोवा एक हिन्दू बहुल राज्य है, जहाँ पर हिन्दू आबादी सबसे ज़्यादा है साल 2011 में जारी किये गए आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 66.08 प्रतिशत हिंदू यानी की लगभग 963,877 लाख हिन्दुओं की आबादी हैं. वहीं गोवा के दोनों जिलों नॉर्थ गोवा और साउथ गोवा में हिंदू बहुल आबादी है. 15 लाख की आबादी वाले गोवा में 8.33 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों यानी की 1.22 लाख की है. हिंदुओं के बाद सबसे ज्यादा तादाद राज्य में ईसाइयों की है. आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 25.10 प्रतिशत ईसाई यानी की 3.66 लाख रहते हैं. ऐसे में गोवा में हिंदुओं के बाद सत्ता में सबसे ज्यादा दबदबा ईसाइयों का है. गोवा ऐसा राज्य है, जहां महज 0.04 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति रहती है. यहां 0.10 प्रतिशत सिख और 0.08 प्रतिशत बौद्ध और जैन समुदाय के लोग रहते हैं. वहीं अन्य धर्मों को मानने वाले लोग सिर्फ 0.02 प्रतिशत हैं. प्रवासी या गैर-गोवा भारतीय मूल के निवासियों की आबादी 50% से अधिक है, जो मूल गोवा की आबादी से अधिक है.

 

अब बात करते है कि पर्यटको के बीच मशहूर गोवा राज्य में आखिर चुनावी मुद्दे है क्या क्या ?

 

एक मीडिया हाउस की तरफ से हाल ही में किए गए शोध में यह पता चला है की गोवा में सबसे पहला चुनावी मुद्दा है  खनन का, दक्षिण गोवा का सबसे बड़ा मुद्दा खनन है। 2012 से पहले राज्य की अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी पर्यटन से भी ज्यादा थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य में दस साल से खनन बंद है। इस चुनाव में सभी पार्टियां सत्ता में आने पर इसे दोबारा शुरू कराने का वादा कर रही हैं। आम आदमी पार्टी ने तो सत्ता में आने के छह महीने के भीतर इसे दोबारा शुरू कराने का वादा किया है।  अगला मुद्दा है  बेरोजगारी का, युवाओं में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। कोरोना की वजह से पर्यटन पर पड़े बुरे असर ने इसे बढ़ाने का काम किया है। पिछले 10 साल से बंद पड़े खनन कारोबार ने भी इसे बढ़ाया है। पहले राज्य की अर्थव्यवस्था में लौह अयस्क के खनन की हिस्सेदारी करीब 75% थी।  वहीं एक और मुद्दा जो ज़ोर शोर से उठाया गया है वो है भ्रष्टाचार का, गोवा में भ्रष्टाचार भी चुनावी मुद्दा है।  विपक्ष राज्य में भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रहा है। अरविंद केजरीवाल ने तो गोवा को पहली भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने का वादा किया है।

 

हालांकि चुनाव के लिहाज़ से गोवा भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योँकि पिछले चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी लेकिन भाजपा ने जोड़ तोड़ करके अपनी सरकार दोनों राज्यों में बनाई। गोवा में इस बार भाजपा बिना अपने कद्दावर नेता मनोहर परिकर के चुनाव मैदान में है और मौजूदा मुख्यमंत्री को लेकर भाजपा का ही एक खेमा खासा असहज है। उधर कांग्रेस की संभावनाओं पर ग्रहण लगाने के लिए आम आदमी पार्टी के साथ साथ इस बार तृणमूल कांग्रेस ने भी गोवा में खम ठोंका है।लेकिन मुख्य मुकाबला सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के ही बीच है.

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