सत्तर घाट पुल को लेकर घिरी सरकार ने दिया जवाब

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बिहार में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश और नेपाल के द्वारा पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी पर भारी दबाव आ गया. बुधवार को गंडक में तीन लाख से ज्यादा क्यूसेक पानी का बहाव था जिससे गोपालगंज को चंपारण, सारण और तिरहूत से जोड़ने वाला सत्तरघाट महासेतु एप्रोच रोज टूट गया. इसके बाद से बैकुंठपुर के फैजुल्लाहपुर में इस पुल के टूट जाने से आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है. इस पुल को सीएम नीतीश कुमार ने 16 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन किया था.

संजय झा ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि सत्तर घाट मुख्य पुल से लगभग दो किमी दूर गोपालगंज की ओर से एक 18 मी लंबाई के छोटे पुल का पहुंच पथ कट गया है. यह छोटा पुल गंडक नदी के बांद के अंदर अवस्थित है. गंडक नदी में पानी का दबाव गोपालगंज की ओर ज्यादा है. इस कारण पुल के पहुंच का सड़क का हिस्सा कट गया है. उन्होने आगे लिखा है कि यह अप्रत्याशित पानी के दबाव के कारण हुआ है. इस कटाव के छोटे पुल की संरचना को कोई नुकसान नहीं हुआऑ है. मुख्य सत्तर घाट पुल जो 1.4 किमी लंबा है वह पूर्णतः सुरक्षित है. पानी का दबाव कम होते ही यातायात चालू कर दिया जाएगा. इस योजना में कोई अनियमतता का मामला नहीं है. यह प्राकृतिक आपदा है. विभाग पूरी तरह मुस्तैद है.

इधर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीॉएम नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए लिखा है कि 263 करोड़ से 8 साल में बना लेकिन मात्र 29 दिन में ढह गया पुल. संगठित भ्रष्टाचार के भीष्म पितामह नीतीश जी इस पर एक शब्द भी नहीं बोलेंगे और न ही साइकिल से रेंज रोवर की सवारी कराने वाले भ्रष्टाचारी सहपाठी पथ निर्माण मंत्री को बर्खास्त करेंगे. बिहार में चारों तरफ लूट ही लूट मची है.

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