जानें किन-किन पौराणिक कथाओं से जुड़ा है होली

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भारत वर्ष में होली बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. आज के दौर में हम होली के नाम से जानते हैं लेकिन इसके पूर्व इसका कुछ और ही नाम था. हिन्दू पंचांग के मुताबिक फाल्गुन माह में पूर्णिमा के मौके पर इस पर्व को लोग हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. होली के साथ कई पौराणिक कथाएं भी जुडी हुई है. शुरुआत में ऐसे होलाका के नाम से जाना जाता था. इस दिन आर्य नवात्रैष्टि यज्ञ भी कराया करते थे. मुग़ल शासक शाहजहाँ के काम में होली को ईद-ए- गुलाबी के नाम से सम्बोधित किया जाता था.

होली को लेकर एक पौराणिक कथा यह है कि सबसे ज्यादा मान्यता भगवान शिव और पार्वती से जुड़ी हुई है. इस कथा के अनुसार पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी और भगवान शिव तपस्या में लीन थे. कामदेव पार्वती की सहायता के लिए प्रेम बाण चलाते हैं। इससे भगवान शिव की तपस्या भंग हो जाती है.

शिवजी को इस दौरान काफी क्रोध हो आता है और वे अपनी तीसरी आँख खोल देती है. उनके क्रो-ध की ज्वा-ला कामदेव का शरीर भ-स्म हो जाता है. इस सबके बाद शिवजी पार्वती को देखते हैं और पार्वती की आराधना सफल हो जाती है और शिवजी उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेते हैं. होली की आ-ग में वासनात्मक आकर्षण को प्रतीकात्मक रूप से जला कर सच्चे प्रेम के विजय के उत्सव में मनाया जाता है.

दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार हिरणकश्यप और उसकी बहन होलिका की कथा प्रचलित है. राजा हिरणकश्यप ने तपस्या कर भगवान ब्रह्मा से अमर होने का वरदान माँगा था. उसने ब्रह्मा से वरदान माँगा कि उसे संसार में कोई भी जीव-जंतु, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य, रात, दिन पृथ्वी, आकाश, घर या बाहर मार न सके.

वरदान पाते ही वह नि-रंकुश हो गया. उस दौरान उसी का बेटा प्रह्लाद जन्मा। वह भगवान में भक्ति रखता था. भगवान विष्णु का पराम् भक्त था. उसे भगवन विष्णु की कृपा-दृष्टि प्राप्त थी. हिरणकश्यप ने कई बार अपने पुत्र की प्राण लिए जाने की कोशिश की क्यूंकि उसने आदेश दिया था कि प्रह्लाद किसी अन्य की भक्ति न करें। जब किसी तरह हिरणकश्यप खुद को जीतता हुआ नहीं पा सका तो अपनी बहन होलिका को उसे गोद में लेकर बैठी। होलिका को आग से बचने का वरदान प्राप्त था. लेकिन हुआ कुछ यह कि प्रह्लाद बच गया और होलिका आग में भ-स्म हो गई। तभी से होली मनाई जाती है.

तीसरे कथा के अनुसार पूतना एक सुन्दर स्त्री का रूप धारण कर आती है और बालक भगवन कृष्ण को ज-हरीला दूध पिलाकर मारने की कोशिश करती है. बालक कृष्ण ने दूध के साथ उसके प्रा-ण भी ले लिए.

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