जानिए, रामविलास पासवान की पहली पत्नी के साथ चिराग पासवान के कैसे हैं संबंध

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बिहार के दिग्गज राजनेता रहे रामविलास पासवान कई सरकारों में केंद्रीय मंत्री रहे हैं. पिछले दिनों 8 अक्टूबर को उनका दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. आपको बता दें कि बिहार में इस समय विधानसभा चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है. बिहार में 28 नवंबर को पहले चरण का मतदान शुरू हो जाएगा. ऐसे में अब चिराग के सामने पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. चिराग पासवान को अब पार्टी के साथ ही परिवार की भी जिम्मादारियों का निर्वहन करना है.

आपको बतादें कि दिवंगत रामविलास पासवान ने दो शादी की थी. उनकी पहली शादी 1960 में राजकुमारी देवी से हुई थी. जिसके बाद वे अलग हो गए. उसके बाद उन्होंने दूसरी शादी की 1983 में चिराग पासवान रामविलास पासवान की दूसरी पत्नी के बेटे हैं. आपको बता दें कि रामविलास पासवान की पहली पत्नी की दो बेटियां हैं. रामविलास पासवान और राजकुमारी देवी के बीच में 1981 में तलाक हो गया था. उन दोनों के तलाक के दो साल के बाद रामविलास पसावान ने 1983 में रीना शर्मा से दूसरी शादी कर ली थी.

जिस समय रामविलास पासवान और रिना शर्मा के बीच में शादी हुई थी. उस समय रिना शर्मा एयर होस्टेस थी. रामविलास पासवान और रिना शर्मा की शादी के बाद दो बच्चे है. बेटे का नाम चिराग पासवान है. जो पहले अभिनेता बने और बाद में राजनेता. इधर रामविलास पासवान की पहली पत्नी राजकुमारी देवी की दो बेटियां है पहली बेटी का नाम उषा और दूसरी का नाम आशा है. आशा के पति अनिल साधु लंबे समय तक अपने ससुर रामविलास पासवान के साथ राजनीति में रहे. फिर मतभेद होने के कारण राजद में चले गए. वर्तमान में अनिल साधु राजद में एससी/एसटी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हैं.

रामविलास पासवान कि पहली पत्नी राजकुमारी देवी आज भी अपने जिला खगड़िया के अपने पैतृक गांव में रहती है. 2019 लोकसभा चुनाव के समय राजकुमारी देवी ने एक न्यूज चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में बताया था कि उनके चिराग पासवान के साथ कैसे रिश्ते हैं. इस दौरान राजकूमारी देवी ने बताया कि चिराग कबी उनसे आर्शीर्वाद लेने अपने पैतृक गांव नहीं आए. काफी लंबे वक्त से चिराग से मुलाकात नहीं हो पाई. उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि चिराग से उनकी आखिरी मुलाकात लगभग पांच साल पहले चिराग के दादा के निध नने वक्त हुई थी.

उन्होंने कहा कि चिराग उनसे मिलने उनके गांव नहीं आते हैं. उन्होंने बता कि उनकी आखिरी मुलाकात लगभग पांच साल पहले हुआ था जब चिराग के दादा का निधन हुआ था उस वक्त वे यहां आए थे. उन्होंने यह बताया कि उनकी बेटी और दामाद उनसे मिलने अक्सर गांव आते रहते हैं. जब उनसे पूछा गया कि आप यहां अकेले कैसे रहती हैं. तो जवाब में उन्होंने कहा कि गांव- समाज के लोग उनकी बहुत इज्जत करते हैं. आस-पड़ोस के लोग उन्हें गांव छोड़कर नहीं जाने देते हैं. वे लोग हर वक्त उनके साथ खड़े रहते हैं.

8 अक्टूबर को जब रामविलास पासवान का निधन हुआ था उस समय उनके पैतृक गांव में तीन दिनों तक चुल्हा नहीं जला था. जब राजकुमारी देवी अपने पति रामविलास पासवान को देखने के लिए पटना पहुंची थी तो वह रोते रोते बार बार बेहोश हो जा रही थी.

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