ऑफिस में 9 घंटे का काम उसके बाद घऱ पर काम, इसके बाद भी बनी IAS

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एक कहावत हम सब ने सुनी होगी मेहनत अगर दिल से किया गया है तो सफलता अपने आप पास आ जाती है. संघर्ष और मेहनत का नाता हर किसी को अपने जीवन में एक नई सीख और नई ऊर्जा दे जाता है. जब तैयारी देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा पास करने की हो तो और भी हिम्मत के साथ अपने आप पर विश्वास की जरूरत होती है. इंसान सफल उसी समय हो जाता है जब वह अपने आप पर विश्वास करना शुरू कर देता है. आज हम एक ऐसी ही UPSC की परीक्षार्थी के बारे में जानेंगे. इनका नाम है काजल ज्वाला.

काजल ज्वाला अपने पांचवे प्रयास में युपीएससी पास हुई थी. जबकि यूपीएससी की तैयारीकरने वाले छात्र दूसरे या तीसरे प्रयास में ही पीछे मुड जाते हैं और दूसरे कामों में लग जाते हैं. लेकिन मेहनत और कुछकर गुजरने की तमन्ना अगर दिल में लिए बैठे हैं तो आप कुछ भी कर सकते हैं. काजल ज्वाला ने 2018 में होने वाली यूपीएससी की परीक्षा में 28 वी रैंक हासिल किया और अनेकों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई. यह कहानी उनके लिए भी है जो यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और महज एक हार के बाद रुक जाने के बारे में सोचते हैं.

काजल की यह कहानी अपने दृढ़ इच्छा शक्ति और मजबूत इरादे का प्रमाण है जो यह साबित करती है कि परिस्थितियां कितने भी जटिल क्यों ना हो हमें हार नहीं माननी चाहिए और निरंतर प्रयासरत रहकर अपने लक्ष्य के प्राप्ति के लिए कठिन मेहनत से पीछे नहीं हटना चाहिए. काजल की कहानी 9 साल पहले शुरू होती है जब उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और हर दूसरे स्टूडेंट्स की भांति एक सपने के साथ अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए कठिन परिश्रम और लगन के साथ UPSC की तैयारी में लग गई.

आपको बता दें कि काजल हरियाणा के शामली की रहने वाली है. काजल एक प्रतिष्ठित संस्थान से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद विप्रो कंपनी में 23 लाख के सालाना पैकेज पर काम कर रही थीं , लेकिन उनका झुकाव हमेशा से ही सरकारी नौकरी के तरफ रहा जहां वह देश की सेवा करना चाहती थीं. समय के साथ काजल की शादी हो गई. उनकी शादी आशीष मालिक से हो गई जो अमेरिकन दूतावास में नौकरी करते थे लेकिन इस शादी से काजल को किसी तरह से परेशानी नहीं हुई जबकि आशीष उन्हें लक्ष्य प्राप्ति में हमेशा मदद करते रहे.

मीडिया से बात करते हुए काजल ने बताया कि उनके लिए समय की कमी एक सबसे बड़ी समस्या थी क्योंकि नौकरी के साथ-साथ घर के काम करने के बाद उन्हें बहुत मुश्किल से पढ़ाई के लिए समय मिल पाता था. इस परिस्थिति में उन्होंने कठिन परिश्रम किया और यूपीएससी की परीक्षा में 28वीं रैंक लाने में सफल रही। उनके अनुसार इस दर्द को केवल वही समझ सकता है जो अपनी जिंदगी में आईएएस और आईपीएस बनने की इच्छा रखता हो. काजल की जिंदगी हमें न हार मानने की सीख देती है इसके साथ ही हमें अपने लक्ष्य तक आखिरी बिंदु तक सोचना चाहिए.

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