नौकरी छोड़ संभाला परिवार, सेल्फ स्टडी से बनी IAS

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भारतीय संस्कृति में महिला के लिए उनका परिवार सर्वप्रथम होता है। परिवार के बाद ही उन्हें अपने कैरियर पर फोकस करने को कहा जाता है. समय मिल सका तो ठीक नहीं तो अपने कैरियर दरकिनार करना ही एकमात्र रास्ता होता है. परिवार को संतुष्ट करना ही पहला मकसद होता है.

विवाह के बाद भारत में पुरुषों को समय कठिनता से मिलता है फिर महिलओं पर तो अपने परिवार, पति से लेकर बच्चों के हर छोटे-बड़े चीज का ख्याल रखना और उसे पूरा करना बड़ी बात होती है. पुष्पलता वर्ष 2015 में सिविल सर्विस की परीक्षा की तैयारी की लेकिन पहले प्रयास में वे 7 नम्बर से सफल नहीं हो सकी. वर्ष 2017 में हुए परीक्षा में वे 80 वीं रैंक हासिल किया और आईएएस अधिकारी बनी.

वे पांच वर्षों से अपनी पढाई छोड़ चुकी है फिर वे वर्ष 2015 में परिवार और दो साल के बच्चे को सँभालते हुए बिना कोचिंग के तैयारी शुरू की और सफल हुयी। उन्होंने कहा कि परीक्षा पास करने के लिए नहीं बल्कि खुद के लिए मेहनत करें, बता दें कि वे हरियाणा की रहने वाली थी. पहली बार सफल नहीं होने पर परिवार वालों ने भी उनका साथ देने से जवाब दे दिया लेकिन वे डटी रही।

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