कैमूर जिले में भाजपा में 02 विधायकों का पत्ता कटना तय है और बगावत भी तय है !

पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में पूरे बिहार में भले ही नीतीश कुमार और महागठबंधन की आंधी थी लेकिन कैमूर एक ऐसा जिला था जहां कि चारों विधानसभा सीटों पर कमल खिल गया था. इन चार सीटों में से मोहनियां सुरक्षित विधानसभा सीट से निरंजन राम, भभुआ से आनंद भूषण पांडेय, चैनपुर से बृजकिशोर बिंद और रामगढ़ से अशोक कुमार सिंह ने जीत दर्ज की थी.

चैनपुर सीट पर तो महागठबंधन के उम्मीदवार महाबली सिंह कुशवाहा को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा था, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं. इस बार भाजपा को अपनी जीती हुई चार सीटों में किन्हीं दो सीटों पर त्याग तो करना ही पड़ेगा और बदले में दो सीटें जदयू को देनी होगी.

BJP free to fight elections alone in Bihar: JD(U) – Mysuru Today

किन सीटों पर भाजपा को करना होगा त्याग

भाजपा किन दो सीटों का त्याग करेगी, इसका चयन करना भी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा मोहनियां और भभुआ सीट जदयू को दे सकती है. मोहनियां से वर्तमान विधायक निरंजन राम की जगह वर्तमान भाजपा सांसद छेदी पासवान के भतीजे चंद्रशेखर पासवान को टिकट दे सकती है.

भभुआ सीट से प्रमोद पटेल का चांस

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2015 में हुए विधानसभा चुनाव में भभुआ से डाॅ प्रमोद कुमार सिंह उर्फ प्रमोद पटेल जदयू के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थें. उन्हें भाजपा के आनंद भूषण पांडेय ने पराजित कर दिया. आनंद भूषण पांडेय की बीच में ही मृत्यू हो गई. उनकी सीट पर जब उपचुनाव हुआ तो स्वर्गीय पांडेय की पत्नी रिंकी रानी पांडेय भाजपा, जदयू की संयुक्त उम्मीदवार हुईं और उन्होंने कांग्रेस के शंभू पटेल को हराया. बेटिकट हुए डाॅ प्रमोद ने दिल से गठबंधन का साथ दिया और रिंकी रानी पांडेय को जीताने में अहम भूमिका निभाई.

शायद उनको उपचुनाव के दौरान यह आश्वासन दिया गया था कि इस बार आप संतोष किजिए, अगली बार आपको टिकट दिया जाएगा. ऐसे में भभुआ और मोहनियां विधानसभा क्षेत्र से अगर एनडीए को बगावत का मुंह देखना पड़ा तो इसमें किसी को किसी प्रकार का कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

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