प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए प्रदेश के हर जिले में बनेंगे इंडस्ट्रियल क्लस्टर

0
501

लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूर अब अपने प्रदेश में आने लगे है. ऐसे में बिहार आए प्रवासी मजदूरों को काम दिलाने और उन्हें छोटे रोजगार के साथ जोड़ने के लिए बिहार सरकार कई योजनाएं ला रही है. राज्य सरकार ने कम पूंजी और जमीन पर छोटे उद्योग लगाने के प्रति फोकस बढ़ा दिया है. सरकार की तरफ से जो योजना बनाई जा रही है उसमें स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता, हुनर के आधार पर छोटी-छोटी इकाइयों का क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है.

पहले से जिलों में चल रहे क्लस्टर के बारे में जानकारी इकट्ठा किया जा रहा है. उद्योग मंत्री श्याम रजक ने कहा कि लोगों को एक तरह के उद्योग एक ही जगह लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधकों को दी गई है. सरकार उद्यमियों को जरूरी इंफ्रास्ट्रक्टर और कॉमन फैसिलेंशन सेंटर बनाकर देगी. उद्यमी इन मशीनों का उपयोग अपने उत्पाद की बेहतरी के लिए करते हैं.

आपको बता दें कि कुछ जगहों को छोड़ दें तो राज्य में क्लस्टर की स्थिति अभी बहुत अच्छी नहीं है. पटना में पीतल, नालंदा में लेदर, झुला और सिलाव, वही भागलपुर और गया में हैंडलूम, पश्चिमी चंपारण में तांबा और कांसे के बर्तनों और मधुबनी में हस्तशिल्प क्लस्टर में वर्तमान में थोड़ा बहुत काम हो रहा है. केंद्र सरकार मखाना क्लस्टर के लिए 1000 करोड़ का प्रावधान है. आपको बता दें कि बिहार में देश के कुल मखाना उत्पादन का 90 प्रतिशत होता है. यहां मखाना उत्पादन की स्थिति अब बहुत अच्छी नहीं रह गई है.

स्त्रोतः-https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/news/now-two-industrial-clusters-will-be-formed-in-every-district-of-bihar-to-give-employment-to-migrants-127341063.html

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here