बिहार के छपरा के “प्रकाश पांडेय” ने शिक्षा में किया बदलाव, किया 400 से ज्यादा बच्चों को शिक्षित

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इस देश में कई सरे ऐसे गांव हैं जहाँ पर काफी ऐसी समस्या है जिसको सुधर करके एक नए देश का निर्माण किया जा सकता है। इन्हीं में एक समस्या है “शिक्षा”, जो की हरेक देश के प्रगति का एक भाग है। फिर चाहे वो शिक्षा गांव के स्तर का हो या शहर के स्तर का हो, सभी को समान रूप से शिक्षा प्राप्त होना चाहिए।

शिक्षा को देश में दिया नया रूप

पूरे देश में शिक्षा को आज व्यवसाय का रूप दे दिया गया है, जबकि शिक्षा का अहम रूप है व्यवस्था। शिक्षा के स्तर को ग्रामीण क्षेत्र में ऊपर उठाना और निजी विद्यालय के बढ़ते व्यवसाय को समाप्त करना जो शिक्षा के मौलिक तत्व को समाप्त कर रहा है। आज ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के संसाधनों के साथ पैसों की भी कमी हो गयी है, जिसके वजह से वहां के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलना मानो ख्वाब बन गया है। जो देश की सबसे बड़ी समस्या बन गई है जिसको जड़ से समाप्त करना बहुत आवश्यक हो गया है |

देश का हरेक युवा ये चाह रहा है देश का प्रगति हो, पर वो यह नहीं जान पा रहा है देश का प्रगति देश के बच्चों और युवाओ पर निर्भर करता है। एक ऐसे शख्स के बारे में आज हम आपको बता रहे हैं जो अपनी व्यस्त एवं मुश्किल दिनचर्या के बाद भी उन्होंने अपने ख्वाबों को कभी भी टूटने नहीं दिया। जिन्होंने गांव की सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों से शिक्षित होकर जब काम के तलाश के लिए देश के कई विभिन्न क्षेत्रों पर गए जहाँ इन्होने अपने अनुभवों को विस्तार किया, और समस्याओं को अच्छे तरहस से समझा और अपना हरेक कदम इसके समाधान के लिय उठाया।

छपरा के प्रकाश पांडेय ने शिक्षा में परिवर्तन के लिए शुरू की नई पहल

ये युवा, जो बिहार के छपरा जिले का रहने वाला है, इसक नाम है प्रकाश पांडेय। किसी भी समस्या का समाधान उसकी जड़ से शुरू होती है, इसी बात को गौर करते हुए बिहार के छोटे से गांव से सम्बन्ध रखने वाले प्रकाश पांडेय, जो की वायुसेना के एक जवान है जिन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एक सरकारी विद्यालय से हासिल चुके हैं, जिन्होंने अपनी शुरूआती पढाई करने के बाद डॉट कॉम में काम किया। प्रकाश पांडेय, जो वायुसेना में चुने जाने के बाद गांव के बच्चों के प्रगति के लिए विद्यालय को खोलने का फैसला लिया।

अब तक 400 से ज्यादा बच्चों को कर चुके हैं शिक्षित

एक मुहीम के जरिये सिर्फ 35 बच्चों से शुरू हुई पाठशाला में अब 400 से ज्यादाबच्चे पढाई करते हैं, और इन बच्चों को पढ़ाने के लिए 20 फीसदी लड़कियों का समूह है। और इन लड़कियों की समूह की विशेष बात यह है कि इसी संस्था से इन लड़कियों की पढाई हुई है। इनका जो उद्देश्य था गांव का प्रगति का आज वो ख्वाब पूरा हो रहा है जो ग्राम के प्रगति में अग्रसर है, उन्ही में से एक प्रोजेक्ट का नाम “प्रोजेक्ट ज्ञान” जिसके जरिये कंप्यूटर की शिक्षा मुफ्त मे मुहैया कराई जा रही है जिसके अंतर्गत अभी तक 45 लड़कियों को यह सुविधा मिल चुकी है।

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