कब होने चाहिए बिहार में विधानसभा के चुनाव, तेजस्वी यादव का पक्ष आ गया सामने

बिहार में विधानसभा का चुनाव होने में अब जरा सा वक्त ही रह गया है. आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि अगले एक महीने के बाद कभी भी चुनाव आयोग अपनी प्रेस काॅफ्रेंस बुलाए और बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दे. चुनाव आयोग का काम है समय पर निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव कराना लेकिन कोरोना महामारी की दस्तक ने कई सारे नए सवालों को जन्म दे दिया है क्योंकि देश क्या पुरी दुनिया ने कभी भी इस तरह के हालातों का सामना नहीं किया होगा.

अभी चुनाव का वक्त सही नहीं

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने चुनाव पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिस तरह के हालात से अभी देश, दुनिया और हमारा राज्य गुजर रहा है, वैसे में विधानसभा चुनाव कराना सही नहीं होगा. तेजस्वी ने यह भी कहा कि पता नहीं चल रहा है कि क्यों कुछ लोगों को बिहार में चुनाव कराने की जल्दबाजी है ? इसके साथ ही तेजस्वी ने सत्ताधारी एनडीए की चुनावी तैयारियों की आलोचना करते हुए कहा कि इधर लोग कोरोना से त्रस्त हैं, लाॅकडाउन की वजह से लोग रोजी रोटी में परेशान हैं उधर एनडीए के लोग वर्चुअल रैलियां कर रहे हैं.

बिहार ऐसा पहला राज्य

कोरोना की महामारी के बाद बिहार देश का पहला राज्य होगा,जहां किसी भी तरह का कोई चुनाव होगा. बिहार विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की निगाहें टिकी होंगी. लोग देखना चाहेंगे कि आखिर किस तरह से निर्वाचन आयोग बिहार में चुनाव संपन्न कराता है क्योंकि इस दफे सोशल डिस्टेंसिंग जैेसी अनिवार्य शर्तों के साथ चुनाव होंगे. क्या राजनीतिक दलों को रैलियां करने की छूट मिलेगी ? क्या नामांकन के वक्त बड़े बड़े काफिले देखने को मिलेंगे या फिर जनसंपर्क में कार्यकर्ताओं का हुजूम प्रत्याशियों के साथ देखने को मिलेगा या फिर नहीं. इतना तो तय है कि इस बार का बिहार विधानसभा चुनाव अब तक के सभी चुनावों से अलग होगा.

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