जमुई के ‘मुरारी शर्मा की साईकिल, है उनका एम्बुलेंस” करते है कुछ इस प्रकार समाज सेवा !

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जमुई के पतंबर गांव के रहने वाले मुरारी शर्मा ने यह साबित कर दिया कि समाजसेवा संपत्तिसंसाधन की मोहताज नहीं है बल्कि यह जिगर की बात है. “ 21 वर्षीय मुरारी शर्मा को मालूम है की गांव में कौनबीमार है, क्या दवाएं चल रही हैं और किसे अस्पताल ले जाने की जरुरत है। किस बच्चे को कब टिका लगाना है. इनसारी बात की उन्हें सभी जानकारी रहती है. वे साइकिल पर बच्चे को बिठाकर अस्पताल ले जाते हैं। उन्हें देखकर पैरेंट्स जान जाते हैं की उनके बच्चों को टिका लगवाना है. वे इलाज तो नहीं करते परन्तु उनके बारे में लोगों का कहना है कि डॉक्टर से कम जानकारी नहीं है उनका।

3 वर्ष के होते ही उनके पिता की मृत्यु हो गयी और माँ भी 13 साल में छोड़ गयी. उनकी माँ काफी दिन से बीमार थी; उन्हें बुखार था और परिवार वाले झाड़फूंक करने ले गए। तभी उन्होंने दृढ निश्चय किया कि वे गांववाले को जागरूक बनाएंगे। उनकी माँ जंगल से बीड़ी पत्ता तोड़ कर लाती और बीड़ी बनाकर बाजार में बेचती थी। इसी से उनदोनों का जीवनयापन होता।

बहुता देखा जाता है कि ऐसे परिवार शिक्षा के प्रति कम ही जागरूक होते हैं लेकिन वे इस सब से जुदा हैं. वे स्नातक की पढाई कर रहे हैं और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं, इससे प्राप्त पैसे से वे अपना खर्चा निकलते हैं। इससब के साथ गरीब होते हुए भी वेएकमात्र अपनी साईकिल से अपने पूरे गाँव की पूरी ईमानदारी से सेवा करते हैं. आज के ज़माने में जहाँ अपने; अपनों का नहीं होता हैँ वो गैरों के है!

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