जदयू ने तेजस्वी के पत्र का दिया जवाब, कहा – तेजस्वी के इस बयान पर अदालत हस्तक्षेप करे

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बिहार में आरोप-प्रत्यारोप के दौर ने नया रूप ले लिया है। आजकल हर नेता चिट्ठी के जरिये अपनी दिल की बात बताने में लगा हुआ है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम 1040 शब्दों का खुली चिट्ठी जारी किया है। तेजस्वी ने अपने चिट्ठी में लिखा है, लोकतांत्रिक मूल्यों एवं जनादेश का अनादर कर आप बिहार की जनता के नज़रों में मान और सम्मान, दोनों खो चुके हैं। अपने चिट्ठी में राजद नेता ने हाल के कुछ सालों में हुए घटनाओं का चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री से बहुत सारे सवाल पूछे हैं और उनके ऊपर अपने पिता लालू यादव को जेल भिजवाने का आरोप भी लगाया है। जदयू ने इनके द्वारा लिखे गए पलटवार किया है।

जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने बताया कि जब बिहार लालू और राबड़ी के शाषन से आज़ाद हुआ तब बिहार को सड़कों में हो चुके गड्डों के स्थिति से बाहर निकाला गया और अब बिहार के प्रत्येक गाँव में बिजली पहुंचा दिया। अँधेरे के बाद पूरे सूबे में नीतीश कुमार ने प्रकाश ले आया। उन्होंने आगे बताया कि नीतीश कुमार, सुशील मोदी, या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजद सुप्रीमो को सजा नहीं दिया है बल्कि उनके ऊपर मुक़दमा चलाकर उन्हें सजा मिला है। अदालत को तेजस्वी के बयान का संज्ञान लेना चाहिए। तेजस्वी यादव के द्वारा इस चिट्टी के जवाब में जदयू पार्टी के नीरज कुमार ने लालू यादव के नाम से चिट्ठी लिखकर जवाब दिया है। नीरज कुमार ने अपनी इस चिट्ठी में लिखा है कि आप बिहार को लालटेन से फिर से उसी वक़्त में क्यों ले जाना चाहते हैं, जिस दौर से बड़ी मुश्किल से बिहार बाहर निकला है।

जदयू नेता ने आगे लिखा, “आपके लालटेन से बिहार में भ्रष्टाचार, नरसंहार, फिरौती के लिए अपहरण ही तो वापस आएगा। अब देखिये ना आपके जेल जाने को लेकर आपके बेटे दूसरों को दोषी ठहरा रहे हैं। आप तो कोर्ट के आदेश से जेल में हैं। अगर माननीय सीएम नीतीश कुमार पर आपके बेटे आरोप लगा रहे हैं, तो फिर जेल से बाहर आने के लिए इतने व्यग्र क्यों हैं ? मेरा ये निवेदन है कि आप अपने पुत्र को जेल में ही बुलाकर कुछ सीखा देते, तो उनके बयानों पर आपकी भी जगहंसाई नहीं होती।” बहरहाल, लोकसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण का मतदान 19 मई को होगा। इसके बाद, 23 मई को चुनाव के परिणाम का ऐलान हो जायेगा। इससे पहले, अभी विरोधी पार्टियों के बीच इसी प्रकार के पत्र-व्यवहार और आरोप-प्रत्यारोप के अभी बहुत सारे दौर चलेंगे।

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