किसकी किस्मत चमकेगी इस बार, राज्यसभा की दो सीटें जेडीयू को

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राज्यसभा की रणभेरी बज चुकी है. जनता दल यूनाइटेड के 03 निवर्तमान सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. इनमें हरिवंश, कहकशां परवीन और रामनाथ ठाकुर हैं. विधानसभा सदस्यों की समस्या पर गौर करेंगे तो इसमें साफ साफ दिखाई देता है कि इस बार जदयू को 03 की जगह सिर्फ 02 सदस्यों को ही राज्यसभा भेजकर संतोष करना पड़ेगा.

ऐसे में सवाल पैदा होता है कि इन तीन राज्यसभा सांसदों में से किसका टिकट कटेगा और किसकी लाॅटरी लगेगी या ऐसा भी हो सकता है कि जनता दल यूनाइटेड के मुखिया नीतीश कुमार किसी नए चेहरे पर दांव लगाएं.

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बत करें हरिवंश की तो उनका टिकट कटना इतना आसान नहीं है. हरिवंश पत्रकारिता बैकग्राउंड से आते हैं. समाजवादी विचारधारा के पोषक हैं. बिहार,झारखंड के जाने माने अखबार प्रभात खबर के प्रधान संपादक रह चुके हैं. इन सबसे अलग जो सबसे बड़ी बात है, वो यह है कि वो फिलहाल में राज्यसभा के उपसभापति हैं. लिहाजा जदयू कभी नहीं चाहेगा कि उपसभापति जैसा महत्वपूर्ण पद उसके हाथ से बाहर निकल जाए. अगर हरिवंश राज्यसभा नहीं जा पाएं तो उपसभापति भी नहीं रह पाएंगे… ऐसे में उनका राज्यसभा जाना 200 प्रतिशत तय है.

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इनमें से दूसरा नाम है रामनाथ ठाकुर. रामनाथ ठाकुर एक ऐसी शख्सियत के पुत्र हैं, जिनका नाम लेकर कई राजनेताओं और राजनीतिक दलों की दुकानदारी चलती है. रामनाथ ठाकुर बिहार के पूर्व सीएम और अति पिछड़ों के पुरोधा रहे कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं. कर्पूरी ठाकुर के पुत्र को राज्यसभा में भेजकर नीतीश कुमार खुद को उनकी विरासत के सबसे बड़े संरक्षक के तौर पर अब तक लीड लेते रहे हैं. रामनाथ ठाकुर को राज्यसभा की सीट से दूर रखना नीतीश कुमार और जदयू के लिए नुकसान का सौदा साबित हो सकता है. रामनाथ ठाकुर से जुड़े वोट बैंक की बदौलत जदयू का वोेट बैंक संतुलित होता है.

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अब तीसरा नाम आता है कहकशां परवीन का. कहा जा रहा है कि कहकशां परवीन का राज्यसभा से पत्ता कटना तय है. एक दौर था जब नीतीश कुमार की पार्टी से तीन तीन अल्पसंख्यक चेहरे राज्यसभा की शोभा बढ़ा रहे थें. इनमें कहकशां परवीन, गुलाम रसूल बलियावी और डाॅ अली अनवर हुआ करते थें.

एक बार कुछ समय के लिए डाॅ एजाज अली भी जदयू की ओर से राज्यसभा गए थें. नीतीश कुमार अक्सर ये दावा करते रहते हैं कि वो भले ही भाजपा के साथ हो लेकिन उन्होंने कभी भी अल्पसंख्यक हितों की अनदेखी होने नहीं दी है. लंबे अरसे बाद पहली बार ऐसा होगा कि जदयू की ओर से कोई भी अल्पसंख्यक चेहरा राज्यसभा की नुमाइंदगी नहीं करेगा.

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