जिसे हासिल करने का सपना देखना भी कठिन है, उसे हकीकत में बदल डाला माँ-बेटे ने

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भारतीय संस्कृति में जब महिला का तलाक हो जाता है तब हमारे समाज में उसे पर्याप्त सम्मान नहीं मिल पाता है. अकेले ही अपने बच्चों की जिम्मेवारियाँ उठाते हुए जिंदगी की कठिनाइयों से लड़ना होता है. ऐसे में एक बड़ा मुकाम हासिल करना पानी पर लकीर खींचने जैसा ही प्रतीत होता है. ऐसी स्थिति में बच्चे कम उम्र से ही जीविकापार्जन में लग जाते हैं और उनकी जिंदगी मुख्यधारा से कटकर जीविकोपार्जन तक ही सीमित रह जाती है.

यह कहानी मुंबई के चॉल में रहे एक माँ-बेटे की है. माँ के पिता से तलाक हो जाने के बाद बेटा जयकुमार वैद्य अपने माँ के सहयोग दिए जाने के लिए कम उम्र से ही मैकेनिक का थोड़ा-बहुत कार्य करके कुछ रूपये कमा लेता था. बेटा माँ को उस जिंदगी से निकलना चाहता था. बेटे के सपने पूरे करने के लिए माँ ने पहले अपने बेटा का सपना पूरा किया और हर मुसीबतें हँसते-हँसते झेलते गई. कई रात वे दोनों भूखे पेट ही सो जाते तो कई रात सिर्फ पानी पीकर ही.

11 वर्ष की उम्र में माँ का सहारा बनने की ठानने वाले जयकुमार वैद्य पढ़ाई भी करते रहे. उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन लेने के लिए इंडियन डेवलपमेंट फाउंडेशन से बिना ब्याज के पैसे उधार लिए। वे कहते हैं कि कुछ लोगों और संस्थाओं ने मुश्किल के दिनों में उनका सहयोग दिया। जब लोग आए बढ़ते हैं तो मदद करने वाला भी मिल ही जाता है.

जब वे इंजीनियरिंग कॉलेज में पढाई कर रहे थे तब उन्हें रोबोटिक्स में प्रदेश और नेशनल लेबल के चार मिला जिससे उनकी हिम्मत बढ़ती गई. पढ़ाई ने रंग लाई और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल में उन्हें 30 हजार की सैलेरी मिलने लगी. जिंदगी जब रफ़्तार पकड़ ली तो उन्होंने जीआरआई और टोफल की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और इसके साथ ही साथ डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, सर्किट एंड ट्रांसमिशन लाइंस एंड सिस्टम तथा कंट्रोल सिस्टम पर कोचिंग भी देने शुरू कर दिए।

टीआईएफआर में जूनियर रिसर्च एसोसिएट में कार्य करते हुए उनके दो रिसर्च पेपर प्रकशित हुए तब उन्हें वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में कार्य करने के लिए ग्रेजुएट रिसर्च असिस्टेंट पद पर निमंत्रित किया गया. उनकी रूचि नैनोस्केल भौतिकी मने हैं वे फिलहाल इसपर रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने अपने माँ को लेकर कहा कि वे ही मेरे जिंदगी की ऐसी शख्स हैं जो हर दिन मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं. वे भारत को औद्दोगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं.

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