बिहार की ज्योति ने बदला समाज, बन गई गाँव के लिए प्रेरणा

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सामाजिक बदलाव ला पाना आसान नहीं होता। सामाजिक बदलाव लाने में और पुरानी रूढ़िवादिता और कुरूतियों को समाप्त करने में लम्बे संघर्ष और बलिदान की कहानी हमारे इतिहास के बंद पन्नों में छपी होती है. वह बदलाव ही वर्तमान में सफलता का शंखनाद करती है.

भागलपुर की ज्योति जो आज एक शिक्षिका हैं, वे आज गाँव के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुकी है. बिहार में आज से दस वर्ष पूर्व बिहार की स्थित और लड़कियों की स्थिति वह नहीं थी जो आज के समय में है, लेकिन आगे बढ़ने वाले पर्वत जैसे संकट से भी नहीं डरा करते हैं. सोहनलाल द्विवेदी के कविता की यह पंक्ति ‘खड़ा हिमालय बता रहा है डरो न आंधी पानी से, खड़े रहो तुम अविचल होकर सब संकट तूफानी में’ बिलकुल ही यहाँ पर प्रेरणा का कार्य करते हुए चरितार्थ होती है.

माँ ने आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आवाज लगाई-दौड़ बेटी दौड़! फिर क्या था ज्योति की आँखों में चमक और पाँव में बिजली दौड़ गई. यही ज्योति ने राष्ट्रीय कबड्डी चैंपियनशिप में भाग लेने वाली बिहार के भागलपुर से पहली महिला खिलाड़ी होने का गौरव प्राप्त किया। ये भागलपुर के हरियो गांव की रहने वाली हैं. आज इस रेस में  इस गांव के अतिरिक्त आस पड़ोस के गांव की भी बेटियाँ आगे बढ़कर अपना कौशल दिखा पा रही है.

उस समय में गाँवों में लड़कियों को पढ़ने के लिए घर से बाहर नहीं भेजा जाता था कर खेल-कूद को लेकर तो न जाने कितने तंज और अपशब्द सुनने को मिल जाते होंगे। ज्योति बताती हैं कि वे इन बंदिशों को तोड़कर आगे बढ़ी और लगभग पूरा समाज प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से विरोध में खड़ा था लेकिन उनका परिवार उनके साथ खड़ा था। वे कहती हैं कि मुझे पूरा समाज से जूझना पड़ा. लेकिन कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उस समय इलाके में अपराध भी काफी होता था। जब सुर्ख़ियों में उनका नाम और गांव का नाम आया तो वे प्रेरणस्रोत बन गई. उन्होंने ये सारी उपलब्धियों को अपने नाम दर्ज कर लिए और इन सरे खेलों में भाग लीं

– 2009 में हिमाचल प्रदेश में अंडर-19 स्कूली कबड्डी प्रतियोगिता

– 2010 व 2013 के महिला खेल महोत्सव

– 2014 में केरल में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप

– 2016 में पटना में हुए सीनियर नेशनल चैंपियनशिप

– चार बार लगातार विश्वविद्यालय कबड्डी प्रतियोगिता।

वे आज भी लड़कियों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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