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ये चाँद सा रोशन चेहरा जुल्फों का रंग सुनहरा ये झील सी नीली आँखे कोई राज है इनमें गहरा तारीफ करूँ क्या उसकी जिसने तुम्हे बनायासाल 1964 में आई फिल्म कश्मीर की कलि में मोहम्मद रफ़ी और शर्मीला टैगोर द्वारा गाया गया यह गाना आज भी लाखो करोड़ो युवाओं की दिल की आवाज है. 60 की दशक का यह गाना आज 21 वीं सदी में भी updateted है. चैकिये मत मैं आपको अपने बेसुरे आवाज में गाना सुनाने नहीं आई हूँ. मैं बस बताना चाह रही हूँ और यह आपने भी जाना होगा की बहुत समय पहले से ही कविताओं और गीतों में कवि प्रेमिकाओं की आँखों की गहराई को व्यक्त करने के लिए झील की संज्ञा देते आये हैं. ये सभी बातें, गाने और कवितायेँ मेरे दिमाग में तब आई जब मैंने सोचा की बिहारी विहार के आज के सेगमेंट में मैं आपको बिहार में स्थित एशिया का सबसे बड़ा मीठे पानी के झील की सफ़र पर लेकर चलती हूँ. तो फिर चलें प्राकृतिक वादियाँ और घने जंगलों से घिरे मिथिला की धरती बेगुसराय जिला स्थित कांवर झील की सफ़र पर. उससे पहले आप हमें कमेन्ट सेक्शन में लिखकर जरुर बताएं ऐसे ही और कौनकौन से गाने हैं जो आपने सुनी है जिसमें झील का जिक्र हो. मुद्दे से भटक जाएं और यह विडियो लम्बा हो जाए उससे पहले हमलोग चलते हैं कंवर झील की. जहाँ आपको मिलेंगे घने जंगलों के बीच एक बड़े से भू भाग में फैला वेट लैंड यानी झील जिसे हम कांवर झील के नाम से जानते हैं और मिलेंगे लाखो पक्षी जिसकी चहचाहट बस आपको मंत्रमुग्ध कर देगी. शाम में वो मिटटी के ऊँचे टीले से सूर्यास्त का नजारा मन करेगा की बस यहीं बस जाऊं. जी हाँ कुछ ऐसा ही होता है शर्दियों के मौसम में अपने कांवर झील का नजारा.

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कहते हैं प्रकृति के पास रहने से मन को शांति मिलती है सुकून मिलता है. लेकिन क्या इसका मतलब यह भी है कि अगर हम पक्षियों के पास रहें, उन्हें देखें, उनकी आवाज सुनें तो हमारी दिमागी सेहत बेहतर रखने में मदद मिलेगी जी हाँ यूके के शोधकर्ताओं ने पाया है कि पक्षियों को देखने और सुनने का हमारी मानसिक स्वास्थ्य के सुधार से संबंध है जिसका असर कम से कम 8 घंटो तक रह सकता है. इतना ही नहीं इसका फायदा डिप्रेशन के शिकार लोगों को भी होता है. अगर आप भी है प्राकृति प्रेमी और प्रकृति की दिए चीजों से आपको भी है प्यार जहाँ जाकर आपको मिलता है सुकून तो चलिए हमारे साथ बेगुसराय जिला से करीब 22 से 23 किलोमीटर की दूरी पर मंझौल गाँव के पास स्थित कांवर झील. बिहार के बेगुसराय में कावर झील एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील हुआ करती थी. लेकिन आज यह कहना मेरे लिए थोडा मुश्किल है क्यूंकि इसका भूभाग कुछ छोटा हो गया है. वो कैसे उसका जिक्र आगे करेंगे. इसके साथ यह बर्ड सेंचुरी यानी पक्षी विहार भी है। इस झील को पक्षी विहार का दर्जा बिहार सरकार ने 1989 में दिया था। यह झील 42 वर्ग किलोमीटर यानी 6311 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैली है। इस बर्ड सेंचुरी में 59 तरह के विदेशी पक्षी और 107 तरह के देसी पक्षी ठंड के मौसम में देखे जा सकते हैं। पुरातत्वीय महत्त्व का बौद्धकालीन हरसाइन स्तूप भी इसी क्षेत्र में स्थित है। इस झील की प्रसिद्धि स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की शरण स्थली के कारण तो है ही साथ ही विविध प्रकार के जलीय पौधों के आश्रय के रूप में भी यह झील काफी मशहूर है। लाखों की संख्या में किस्मकिस्म के पक्षी खासकर नवम्बर से फरवरी तक यहाँ दिखाई देते हैं। अन्तरराष्ट्रीय पक्षी मलेशिया, चीन, श्रीलंका, जापान, साइबेरिया, मंगोलिया, रूस से ठण्ड के मौसम में प्रवास पर यहाँ आते हैं। लेकिन अभी साल 2022 में स्थिति यह है कि कावर झील में पानी की कमी रहने लगी है, नतीजतन विदेशी पक्षी दूसरे झीलों की ओर अपना रुख कर रहे हैं। विगत कुछ वर्षों से झील में जल संकट गहराता जा रहा है। गर्मियों में तो यह बिल्कुल सूख जाती है। इसका कारण है, पर्याप्त पानी झील में इकट्ठा न होना। पहले बरसाती पानी बहकर नालों के जरिए झील में गिरता था, परन्तु अब इन नालों में गाद भर जाने से पानी झील तक नहीं पहुँच पाता है। बाढ़ में आसपास की मिट्टी झील में आने से भी इसकी गहराई कम हो रही है। समय रहते यदि झील को बचाने के लिये प्रयास नहीं किये गए तो आने वाली पीढ़ियाँ इस झील का केवल नाम ही सुन पाएँगी। यहाँ आप शर्दियों के मौसम में यानी नवम्बर से फरवरी तक आ सकते हैं क्यूंकि इसी मौसम में प्रवासी पक्षियाँ यहाँ आती हैं. यहाँ आप हरे भरे जंगलों को निहार सकते हैं. झील में नौका विहार भी कर सकते हैं. झील के किनारे में कई नाविक अपनी नाव लेकर बैठे होते हैं.

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बेगुसराय बिहार के औद्योगिक नगर के रूप में जाना जाता है जहाँ मुख्य रूप से तीन बड़े बड़े उद्योग स्थापित हैं जो की बड़े स्तर पर लाखो लोगो को रोजगार प्रदान करता है. इण्डियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड , बरौनी तेलशोधक कारखना, बरौनी थर्मल पावर स्टेशन अब [NTPC] हिंदुस्तान यूरिया रसायन लिमिटेड[HURL] जिसका र्निर्माण कार्य चालू हैं इसके अलावा कई छोटेछोटे और सहायक उद्योग भी है। यहां कृषि उद्योगों की संभवना काफी ज्यादा है। बेगुसराय हमारे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि होने की वजह से विश्विख्यात है. बेगूसराय की संस्कृति मिथिलांचल की सांस्कृतिक विरासत को परिभाषित करती है। बेगूसराय के लोगों द्वारा बनाई जाने वाली प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग. बेगूसराय सिमरिया मेले के लिए भी प्रसिद्ध है, जो भारतीय पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक के महीने के दौरान भक्ति महत्व का मेला है. ऐसा मना जाता ही की बेगूसराय में पुरुष और महिलाएं बहुत धार्मिक होते हैं. यहां आकाश गंगा रंग चौपाल बरौनी ,द फैक्ट रंगमंडल. आशीर्वाद रंगमंडल जैसी कई प्रमुख नाट्यमंडलियां हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की हैं. सबसे बड़ी बात कांवर झील को आप बेगुसराय की पहचान कहेंगे तो बिलकुल गलत नहीं होगा. कुल मिलाकर कहें तो यह एक बिहार का समृद्ध और विकसित जिला है.

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