SC का बड़ा फैसला : ख़त्म हुआ धारा 497, अब विवाह के बाद संबंध बनाना अपराध नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को Adultery की धारा 497 को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे समाप्त कर दिया है। इस सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि व्यवस्था में समानता एक सिद्धांत है और सबको सामान अधिकार है, और इसके तहत कोई भी पति अपनी पत्नी का मालिक नहीं होता है। हर किसी की अपनी प्रतिष्ठा होती है जो एक आदर्श समाज के लिए जरुरी है।

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने Adultery की धारा 497 को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए धारा 497 को ख़त्म कर दिया। इस सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि महिलाओं को भी मौलिक अधिकारों के इस्तेमाल का पूरा हक़ है और उन्हें यह सोचने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि एक समाज क्या चाहता है.
चीफ जस्टिस ने आगे कहा कि भारत के संविधान की सुंदरता यही है कि इसमें ‘ मैं, मेरा और तुम ‘ सभी शामिल हैं. कोर्ट ने आगे कहा कि व्यभिचार अर्थात शादी के बाद किसी दूसरे से पुरुष से सम्बन्ध बनाना गलत नहीं। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि अगर दो व्यक्ति विवाहित होते हुए आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाते है तो ये गलत नहीं है।

क्या है धारा 497
धारा 497 के अंतर्गत कोई विवाहित महिला अगर अपने पति के अलावा किसी दूसरे पुरुष के साथ अनुमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाती है तो उसे दोषी माना जाता था। परन्तु अब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद महिला को दोषी नहीं माना जाएगा। बल्कि वो किसी अन्य पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए आजाद है।

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