ब्लैक बॉक्स खोल देगा ‘हेलीकॉप्टर क्रै-श’ का पूरा राज ! जानिए क्या है यह ब्लैक बॉक्स

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देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक सीडीएस जनरल बिपिन रावत दुर्भाग्यवश अब इस दुनिया में नहीं रहे , बुधवार को  हेलीकॉप्टर क्रै-श के दौरान उनकी मौ-त हो गई। अब जांच एजेंसियां इस क्रै-श के पीछे के असल कारण का पता लगा रही है और उसमे सबसे महत्वपूर्ण कोई वस्तु है तो वह है ब्लैक बॉक्स जिसे आज गुरूवार को  बरामद कर लिया गया है। लेकिन ब्लैक बॉक्स में ऐसा क्या है? जो वह इस हादसे के पीछे के असल राज का खुलासा कर पाएगा। आइए आज हम आपको बताते है ब्लैक बॉक्स से जुड़ी हर छोटी बड़ी बारीकियों के बारे में।

क्या होता है ब्लैक बॉक्स?
ब्लैक बॉक्स एक विमान का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। यह हर प्रकार के हवाई जहाज में मौजद होता है। इसका मुख्य काम होता है उड़ान के दौरान सभी प्रकार की गतिविधियों को रिकॉर्ड करना। यह विमान के पिछले हिस्से में लगा होता है। ब्लैक बॉक्स एक बेहद मजबूत धातु टाइटेनियम से बना होता है, ताकि हर तरह की विपत्ति में उसी कम से कम नुकसान हो और वह सटीक जानकारी प्रदान कर सके।

ब्लैक बॉक्स की जरूरत क्यों पड़ी:-
हर चीज के दो पहलू होते है कुछ बुरे तो कुछ अच्छे। ऐसे ही कुछ हुआ हवाई जहाज के साथ भी। सन् 1950 में जैसे-जैसे हवाई जहाज़ की संख्या बढ़ी, हवाई हा-दसे में भी बढ़ोतरी हो रही थी। उस समय ऐसे कोई उपाय मौजूद नहीं थी जिससे ये पता लगाया जा सके कि ऐसा क्यों हो रहा है या इसमें किसकी गलती थी, और आगे होने वाली दुघटनाओं से बचा जा सके। इसी कारण ब्लैक बॉक्स का अविष्कार किया गया।शुरुआत में इसके लाल रंग होने के कारण इससे ‘रेड एग’ के नाम से जाना जाता था। मगर बॉक्स की अंदर की दीवार काले रंग की होती है शायद इसी वजह से इसे ब्लैक बॉक्स बुलाया जाने लगा।

कैसे करता है काम ?
ब्लैक बॉक्स के दो अलग अलग बॉक्स होते है और दोनों का काम अलग होते है यह 88 तरह के आंकड़ों के बारे में 25 घंटे तक की रिकॉर्डेड जानकारी एकत्रित करके रखता है। यह इतना जटिल होता है कि विमान में आ-ग लग जाने के बावजूद इसमें कुछ नहीं होता है यह 11,000°C के तापमान को एक घंटे तक सहन कर सकता है जबकि 260°C के तापमान को 10 घंटे तक सहन करने की क्षमता रखता है | ब्लैक बॉक्स का रंग काला नहीं बल्कि लाल या ओरेंज  होता है जिससे कि इसको खोजने में आसानी हो सके | यह बिना बिजली के भी महीनों तक काम कर सकता है अगर विमान जल्दी ना मिल पाए तो उस स्थिति में भी यह डाटा सुरक्षित रखता है।ब्लैक बॉक्स से निकलती है विशेष तरह की तरंगे जो की ढूंढने वाले लोगों द्वारा आसानी से खोजी जा सकती है। अगर दुर्घटनाग्रस्त विमान समुंद्र में गिर जाता है तो भी 20000 फीट तक इसकी तरंगे निकलती रहती है यह 30 दिनों तक लगातार निकलती रहती है।

ब्लैक बॉक्स का दूसरा हिस्सा कॉकपिट वायस रिकॉर्डर जो की विमान में हो रही आखिरी दो घंटों की आवाजें रिकॉर्ड करता है।यह विमान के इंजन की आवाज, इमरजेंसी अलार्म की आवाज और पायलट और को-पायलट के बीच में हो रही बात चीत को रिकॉर्ड करता है।

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