कारगिल विजय दिवस विशेषः बिहार के लाल ने सबसे पहले पाकिस्तानियों के इस किले पर किया था कब्जा

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देश के जवानों के पराक्रम की कहानियां आपने खुब सुनी होगी. जब बात देश के आन की हो तो हर किसी की भैंए तन जाती है. करगिल की लड़ाई में भी भारतीय जवानों ने अपने पराक्रम के दम पर पाकिस्तानियों के दांत खट्टे किए थे. आज भी उनके पराक्रम की कहानियां सुन कर हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. देशभक्ति का जज्बा जाग जाता है. भारत पाकिस्तान के साथ करगिल की लड़ाई को कौन भूल सकता है. बीआरसी के फर्स्ट बटालियन के योद्धाओं ने सर्वप्रथम दुश्मन के किले को भेदा और विजयी तिरंगा फहराया था. करगिल के बटालिक सब सेक्टर में 14000 फुट की ऊंचाई पर पाकिस्तान की सेना और घुसपैठिये जगह जगह किलेबंदी किया था.

पाकिस्तानी सेना ने चारो तरफ बारूदी सुंरगे और तोपों को लगा रखा था. जब इसकी जानकारी भारतीय जवानों को लगी तो वह कार्रवाई शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ गए. 28 मई 1999 को ऑपरेशन विजय प्रारम्भ हुआ. मानस बल डलझील से एक बटालियन के जवानों को संध्या बेला में अपनी मिशन पर कूच कर दिया गया. ऊंचे नीचे पहाड़ों, खाइयों व नदी-नालों को पार करते हुए अगले दिन सुबह सभी सैनिक बटालिक सब सेक्टर पहुंचे. रात भर का सफर तय करने के बाद भी सैनिकों को आराम करने का मौका नहीं मिला. इसके बाद भी वे चार घंटे पैदल चल कर घुसपैठियों पर हमाल बोल दिया.

चार्ली कंपनी में नायक गणेश प्रसाद यादव को आक्रमण दल में सबसे आगे रखा गया था. छिपते छिपाते हुए भारतीय सैनिक दुश्मनों के बनाये किलेबंदी तक पहुंच गए. इस दौरान दुश्मनों द्वारा तोपों से गोले व गोलियां बरसाई जा रही थीं. तभी भारतीय सैनिकों का एक दल ने अचानक से हमला बोल दिया,जिससे पाकिस्तानी सेना को सोचने का मौका नहीं मिला. इसके बाद से दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई. इसी दौरान चार्ली कंपनी के नायक गणेश प्रसाद यादव सीधा दुश्मनों के बनाए किले में घुस गए और विदेशी सिपाहियों पर टूट पड़े.

गणेश प्रसाद ने अपनी जान की परवाह किए बगैर दुश्मनों पर लगातार गोली बरसाते रहे. इस दौरान उनके गोली से न जाने कितने दुश्मनों की गोली लगी. कितने मारे गए और कितने ही घायल होकर जमीन पर लेट गए. तभी इनके कुल्हे पर दुश्मन की एक गोली आकर लगी. लेकिन इसके बाद भी वे हताश नहीं हुए और उन्होंने गोली चलाना जारी रखा. और आगे बढते रहे. अंततः वे मां भारती के गोद में हमेशा के लिए सो गए. आज भी जब इनकी बहादुरी के किस्से जवानों को सुनाया जाता है जिससे की जवानों में जोश बना रहे. गणेश यादव को सेना ने मरणोपरान्त वीरचक्र से सम्मानित किया गया. बिहार लाल गणेश यादव को बिहारी न्जूज सदा याद करते रहेगा. अपने लाल को सलाम…

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