आखिर एक भी विश्व कप क्यों नहीं खेल पाया भारत का यह महान बल्लेबाज ?

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 वो दौर था, जब भारत के पास Sachin Tendulkar (सचिन तेंदुलकर), Sourav Ganguly (सौरव गांगुली) और Rahul Dravid(राहुल द्रविड़) की तिकड़ी थी. ये वो दौर था जब ये त्रिदेव भारतीय क्रिकेट पर राज कर रहे थे. ऐसे ही दौर में आया एक ऐसा बल्लेबाज, जिसने अपनी अलग पहचान बनाई. जिसने ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अपना जौहर दिखाया. जिसने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की नींद उड़ा दी. इनके बारे में कहा जाता था कि इनको आप बेड से भी उठाकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उतार दो, बंदा शतक ठोककर ही आएगा. इस खिलाड़ी का नाम है VVS Laxman.

कोलकाता के ईडन गार्डन में खेला गया वो टेस्ट मैच कोई भारतीय भूल सकता है क्या, जिसमें वीवीएस लक्ष्मण ने अपने करियर की सबसे यादगार पारी खेली और भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई. वो पारी सचमुच जादुई थी क्योंकि जहां लग रहा था ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में ही भारत को हरा देगा, वहां इस बल्लेबाज ने आकर ऐसा खेल दिखाया, ऐसी अधुभुत बल्लेबाजी की, कि भारत को हारा हुआ मुकाबला जितवा दिया. 2001 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन में वो ऐतिहासिक टेस्ट मैच खेला गया था, जिसमें लक्ष्मण ने ऑस्ट्रेलियाई टीम और उनके फैंस को रुलाया था. पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया ने 445 रन बनाए थे, और भारत की पहली पारी में लक्ष्मण ही टॉपस्कोरर रहे थे. भारत सिर्फ 171 रनों पर ढेर हो गई और लक्ष्मण 59 रन बनाकर टॉपस्कोरर रहे थे. भारत को फोलोऑन खेलना पड़ा और भारत का हारना तय लग रहा था लेकिन लक्ष्मण ने ऐसी पारी खेली, जो एक मिसाल बन गई. उन्होंने 452 गेंदों का सामना किया और 281 रन बनाए, इस दौरान उन्होंने 1 भी छक्का नहीं लगाया लेकिन 44 चौके लगा दिए.

उन्होंने राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर 376 रनों की साझेदारी की, जो एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया. द्रविड़ ने 180 रन बनाए, दोनों की पारी की बदौलत भारत ने अपनी दूसरी पारी 657 रनों पर घोषित कर दिया. इसके बाद हरभजन सिंह ने अपनी फिरकी का कमाल दिखाया और 6 विकेट झटक लिए और ऑस्ट्रेलियाई टीम को 212 रनों पर ऑलआउट कर दिया. भारत ने 171 रनों से जीत लिया मुकाबला. इसके बाद भी लक्ष्मण ने कई मौकों पर भारत को हारा हुआ मुकाबला जितवाया. इसके बाद लक्ष्मण भारत की टेस्ट टीम का अभिन्न अंग बन गए. लेकिन वनडे टीम का नियमित सदस्य कभी नहीं बन पाए. उनकी पहचान एक टेस्ट बल्लेबाज के रूप में होने लगी.

फिर आया साल 2003, जिसमें वर्ल्ड कप टीम में उनका चयन तय था लेकिन आखिरी समय में उनको बाहर कर दिया गया. लक्ष्मण इससे टूट गए. लक्ष्मण ने अपनी किताब 281 एंड बियॉन्ड में कहा है कि जब उन्हें वर्ल्ड कप टीम में नहीं चुना गया तो वो काफी निराश थे और क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था. लेकिन उनके कुछ करीबी खिलाड़ियों ने उनसे ऐसा नहीं करने को कहा और लक्ष्मण ने उनकी बात मान ली. इसके बाद भी लक्ष्मण ने भारत के लिए कई शानदार पारी खेली और कई मौकों पर टीम को संकट से निकाला.

वीवीएस लक्ष्मण ऑस्ट्रेलिया के काल थे, ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज उनसे खौफ खाते थे. 2007-08 में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई और वहां भी लक्ष्मण ने अपने बल्ले से कहर बरपाया. उन्होंने अपने करियर का 12वां शतक जड़ा जो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5वां था. इसलिए तो लक्ष्मण को वेरी वेरी स्पेशल लक्ष्मण कहा जाने लगा. लक्ष्मण ने भारत के लिए 134 टेस्ट मैचों की 225 पारियों में 32 बार नॉटआउट रहते हुए 45.5 की औसत से 8781 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 17 शतक, 2 दोहरे शतक और 56 अर्धशतक लगाए. लेकिन हैरान करने वाली बात ये रही कि भारत के लिए 86 वनडे खेल चुके लक्ष्मण एक भी वर्ल्ड कप नहीं खेल पाए. वनडे आंकड़े उनके काबिलियत के साथ न्याय नहीं करते और शायद इसलिए भी वर्ल्ड कप टीम में उनका चयन नहीं हुआ. उनके वनडे करियर को देखें तो उन्होंने 2338 रन बनाए हैं, जिसमें 6 शतक और 10 अर्धशतक शामिल है. वीवीएस लक्ष्मण ने अपना आखिरी टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 24 जनवरी, 2012 को खेला. इसके बाद उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया. हालांकि लक्ष्मण इसके बाद भी क्रिकेट से जुड़े रहे. वो आईपीएल में मेंटोर की भूमिका में नजर आए. खाली समय में उन्होंने कमेंट्री भी की.

2011 में भारत सरकार ने उनको प्रतिष्ठित पद्म श्री आवर्ड से सम्मानित किया. फ़िलहाल वीवीएस लक्ष्मण नेशनल क्रिकेट अकैडमी(NCA) के अध्यक्ष हैं और वहां युवा पीढ़ी को भविष के लिए तैयार कर रहे हैं.

दोस्तों आपको क्या लगता है, वीवीएस लक्ष्मण वर्ल्ड कप खेलने के हक़दार थे या नहीं ? कमेंट करें.

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