आपातकाल में गए थे जेल बने देश के दिग्गज नेता

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देश में जब आपातकाल की बात होती है तो जय प्रकाश नारायण और इंदिरा गांधी का नाम जरूर लिया जाता है. भारतीय राजनीति में व्यवस्था के बदलाव के लिए संपूर्ण क्रांति के आह्वान के लिए इंदिरा गांधी की तत्कालीन सरकार को सत्ता से बाहर करने और लोकतंत्र की बहाली के लिए जयप्रकाश नारायण ने सरकार के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया था. इस आंदोलन का असर यह रहा कि देश में 25 जून 1975 को देश में आपातकाल की घोषणा कर दी गई. यह आपातकाल 21 मार्च 1977 तक देश में जारी रहा था. इस आपातकाल के बाद से देश की राजनीति की दशा और दिशा ही बदल दी थी. इस आंदोलन के बाद देश के कई ऐसे नेता थे जिन्हें जेल की हवा खानी पड़ी लेकिन बाद में वे देश के बड़े नेता बने. इस आंदोलन से उभरे नेताओं में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई, चंद्रशेखर सिंह, वीपी सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, शरद यादव, जार्ज फर्नांडिस, सुबोधकांत सहाय, मुलायम सिंह यादव, रामकृष्ण हेगड़े और जाबिर हुसैन रहे जिन्होंने बाद में देश के अलगअलग राज्यों में सत्ता में रहे.

सबसे पहले बात जॉर्ज फर्नाडिस के बारे में

पूर्व रक्षा मंत्री और श्रमिकों के नेता रहे जॉर्ज फर्नाडिस आपातकाल के दौरान बड़े नेता बनकर उभरे. वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे जॉर्ज फर्नाडिस का राज्यभा का आखिरी कार्यकाल अगस्त 2009 और जुलाई 2010 के बीच में रहा था. 1967 से 2004 तक 9 लोकसभा चुनाव लड़ने वाले फर्नांडिस ने कई सरकार विरोधी आंदोलन चलाए थे.

अब बात रामकृष्ण हेगड़े के बारे में

राम कृष्ण हेगड़े को मिस्टर क्लीन भी कहा जाता है. वे कर्नाटक के तीन बार मुख्यमंत्री रहे. हेगड़े कर्नाटक के इतिहास में पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने थे. 80 के दशक के आखिरी दिनों में जब कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर थी. और वीपी सिंह विपक्ष की राजनीति की धुरी बने प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदारों में से एक थे.

इसके बात अब हम बात करते हैं सब्रमण्यम स्वामी के बारे में

आपातकाल के दौरान स्वामी बीजेपी के बड़े नेता बनकर उभरे. आपको बता दें कि स्वामी इमरजेंसी से पहले ही इंदिरा गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. सुब्रमण्यम स्वामी की उदारवादी आर्थिक नीतियों की इंदिरा गांधी बहुत बड़ी विरोधी थी. आपको बता दें कि सुब्रमण्यम स्वामी 1969 में दिल्ली IIT से जुड़ गए थे इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया की भारत पंचवर्षीय योजनाओं से दूर रहना चाहिए और बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. इन्ही सब कारणों से सुब्रमण्यम स्वामी इंदिरा गांधी के विरोधी रहे हैं.

अब बात उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बारे में

पहलवानी के दांव में माहिर रहे मुलायम सिंह यादव सियासी पारी के दांव में भी माहिर थे. वे मात्र 15 साल की आयु में ही राजनीतिक के अखाड़े में उतर गए थे. वे 1954 से ही आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं. वे समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया के नहर रेट आंदोलन में भाग लिया और जेल गए. इसके बाद वह राम सेव यादव, कर्पूरी ठाकुर, जनेश्वर मिश्र और राज नारायण जैसे दिग्गजों के टच में आए. इसके बाद वे औपचारिक तौर पर मुलायम सिंह यादव 1960 में राजनीति का हिस्सा बने.

अब बात बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद के संस्थापक लालू यादव के बारे में….

जब आपातकाल की बात होती है तो लालू यादव का नाम सबसे पहले लिया जाता है. लालू यादव बिहार की राजनीति में अपनी गबंई अदाज और अपनी वाक्य पटुता के लिए जाने जाते हैं. 1990 से 1997 तक वे बिहार के मुख्यमंत्री रहे. उनके कार्यकाल के दौरान हुए चारा घोटाला की वजह से रांची जेल में बंद हैं. 22 साल की उम्र में लालू यादव पहली बार राजनीति में आए और पटना यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के महासचिव बनाए गए. सन् 1975 में लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया गया और 77 तक वे जेल में बंद रहे. 1977 में 29 साल की उम्र में लालू यादव सांसद बने और सबसे कम उम्र के नेता का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया.

लालकृष्ण आडवाणी

अब बात उस राजनेता की जिसने देश में हिंदुत्व के सहारे अपनी राजनीतिक कैरियर की शुरूआत की और जब उनकी पार्टी की सरकार बनी तो वे हासिय पर चले गए जी हां हम बात कर रहे हैं लालकृष्ण आडवाणी कीभाजपा के वरिष्ठ नेता और संस्थापक सद्सय रहे लालकृष्ण आडवाणी आपातकाल के दौरान 19 महीने तक जेल में रहे. बाद में एनडीए की सरकारमें वो डिप्टी प्राइम मिनिस्टर रहे. आज पार्टी में इनकी हैसियत एक वरिष्ठ नेता की है.

चंद्रशेखर

अब बात करते हैं देश के नौवे प्रधानमंत्री की जिसके नाम से आज भी लोग बलिया को बागी बलिया कहते हैं. हम बात कर रहे है चंद्रशेखर के बारे में…. कांग्रेस से बागी तेवर अपनाने के कारण चंद्रशेखर 1975 में इमरजेंसी के दौरा उन कांग्रेसी नेताओं में से एक थे, जिन्हें विपक्षी दल के नेताओं के साथ जेल में ठूंस दिया गया था. इमरजेंसी के बाद वे विपक्ष की बनी दल में जनता दल के अध्यक्ष बने लेकिन जब जनता दल की सरकार बनी तो उन्होंने मंत्री बनने से इंकार कर दिया. वे हमेशा सत्ता के साथ संघर्ष करते रहे.

चौधरी चरण सिंह

अब बात देश के पांचवे प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह के बारे मेंचौधरी चरण सिंह आपातकाल के दौरान तिहाड़ जेल में बंद रहे. आपातकाल के दौरान 25 जून 1975 से मार्च 1976 तक दिल्ली में बड़े नेता रहे. चौधरी चरण सिंह ने लगातार 40 सालों तक कांग्रेस की सेवा करने के बाद 1967 में पार्टी से इस्तीफा किया. चौधरी चरण सिंह 1979 में प्रधानमंत्री बन गए. हांलाकि कुछ दिन के बाद ही इंदिरा गांधी ने समर्थन वापस ले लिया और चरण सिंह की सरकार भी गिर गई.

नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इमरजेंसी के दौरान 10 जून, 1976 की रात में गिरफ्तार हुये थे. उन्हें भोजपुर जिले के संदेश थाने से गिरफ्तार किया गया था. आपको बता दें कि नीतीश कुमार की गिरफ्तारी पर 15 पुलिस पदाधिकारियों तथा सिपाहियों को 2750 रुपये का इनाम मिला था. नीतीश कुमार के साथ महेंद्र दूबे और पीरो के गांधी कहे जाने वाले रामएकवाल वरसी को भी गिरफ्तार किया गया था. नीतीश कुमार समेत छह नेताओं को मिसा के तहत गिरफ्तार किया गया था.

आपातकाल के दौरान ये राजनेता इंदिरा की सरकार के विरोध में आंदोलन करते रहे और जेल की हवा भी खाई. लेकिन बाद के दिनों में वे देश की राजनीति में कई अहम पदों पर रहें………..

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