लोकसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद राजद और कांग्रेस हो रही है पस्त

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राजद के नेता तेजस्वी यादव कहाँ हैं किसी को खबर तक नहीं है. तेजस्वी यादव पिछले तीन महीनों से गायब हैं और वे कहाँ हैं इस बात की जानकारी उनके पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक तक को नहीं मालूम। वे पिछले तीन माह से राजनितिक कार्यक्रम में भी हिस्सा नहीं ले रहे हैं। उनके पार्टी के सदस्यों को दिशानिर्देश की कमी हो चुकी है. लालू यादव के जेल में होने और तेजस्वी के ना होने से पूरी पार्टी दिशाविहीन हो गयी है। हालाँकि संगठनात्म चुनाव और सदस्यता अभियान की शुरूआत तो पार्टी द्वारा हो गयी है लेकिन लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद और फिर कांग्रेस इस करारी हार को सह नहीं पा रहे हैं. राजद के विधायक ने कहा है कि बिना नेतृत्व के पार्टी किधर जा रही है कुछ खबर ही नहीं है, स्तिथि चिंताजनक हो चुकी है। नेतृत्व के आभाव में पार्टी के सदस्यों का मनोबल टूट रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी और ऱघुवंश प्रसाद सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर इसी तरह पार्टी के सदस्यों का मनोबल टूटता गया और तेजस्वी भी कमान न संभालें तो आगे 2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कुछ हासिल कर पाना नामुमकिन दिख रहा है।

लालू परिवार के धूर विरोधी पप्पू यादव से जीतनराम मांझी बात करके यह साफ शब्दों में बयां कर रहे हैं कि अगर उन्हें महागठबंधन में बेहतर भागीदारी ना मिले तो वे दूसरा विकल्प तलाशेंगे। वीआईपी के मुकेश सहनी भी पार्टी की यही स्तिथि रहने पर पार्टी को 2020 के चुनाव से पहले ही छोड़ देने को दिख रहे हैं।

महागठबंधन के चौथे सहयोगी उपेन्द्र कुशवाहा ने अबतक कोई विरोध नहीं दर्शाया है बल्कि वे पार्टी में मेहनत कर रहे हैं, फिलहाल उनका ध्यान पार्टी की सदस्य्ता अभियान पर लगा हैं। वे पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं।

वहीँ कांग्रेस की भी स्तिथि डगमडोल है। करारी हर के बाद खुद को संभल पाना नामुमकिन प्रतीत हो रहा है.बिहार के कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग की है, वहीँ बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल और सह प्रभारी ने भी इस्तीफे की घोषणा कर दी. पार्टी के अंदर न कोई संतुलन है और ना ही उसे संभल पाने के लिए नेतृत्व दिख रहा है।

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