यूरोप की तरह बनाना है बिहार तो लंदन में पढ़ी इस लड़की को सीएम बनाएं !

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ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ये पुष्पम प्रिया चौधरी कह रही हैं कि अगर बिहार की जनता उन्हें अगला मुख्यमंत्री बनाती है तो वो बिहार को यूरोप की तरह विकसित कर सकती हैं.

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रुकिए, ठहरिए…. हंसने और मजाक उड़ाने से पहले पुष्पम प्रिया चौधरी की प्रोफाइल पहले जान लिजिए, फिर आप खुद सोचने पर विवश हो जाएंगे.

पुष्पम प्रिया चौधरी. इन दिनों बिहार की राजनीति और मीडिया की सुर्खियों में हैं. पुष्पम प्रिया चौधरी खुद को बिहार की अगली मुख्यमंत्री के तौर पर पेश कर रहीं हैं. पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिहार के अखबारों में विज्ञापन देकर खुद को अगले सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट किया है. मीडिया ने पुष्पम प्रिया चौधरी का नामकरण कर दिया है मिस्ट्री गर्ल.

पिछले 08 मार्च को महिला दिवस के दिन पुष्पम ने एक नए राजनीतिक दल का गठन किया है जिसका नाम है प्लूरल्स. पुष्पम खुद इस पार्टी की अध्यक्ष हैं. पुष्पम का कहना है कि बिहार उनका पहला प्यार है. बिहार और बिहार के लोगों को लेकर उन्हें काफी दर्द है. बिहार लगातार पिछड़ता जा रहा है और वो बिहार को इस अंधेरे से बाहर निकालने के लिए काम करना चाहती हैं.

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ये तो रहा मिस्ट्री गर्ल पुष्पम का विजन. अब जान लिजिए पुष्पम के क्वालिफिकेशन के बारे में. पुष्पम ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक से लोक प्रशासन में एमए किया है. इसके बाद ब्रिटेन में ही उन्होंने डेवलपमेंट स्टडी में एमए किया.

पुष्पम का एक परिचय यह भी है कि वो बिहार के दरभंगा की रहने वाली हैं. उनके पिता विनोद चौधरी जेडीयू के एमएलसी रह चुके हैं और अभी भी जेडीयू के नेता है. पुष्पम के पिताजी का पूरा सहयोग अपनी बेटी के साथ है. पुष्पम के पिताजी विनोद चौधरी का कहना है कि उनकी बेटी एक पढ़ी लिखी लड़की है. उसने अगर कोई फैसला लिया है तो सोच समझ कर ही लिया होगा. मैं तो फिलहाल जदयू और नीतीश कुमार के साथ हूं और दरभंगा एमएलसी चुनाव में लगा हुआ हूं.

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पुष्पम की पार्टी प्लूरल का नारा है, जन गण सबका शासन. उनका कहना है कि बिहार में बिहार के लोगों का शासन होगा. बिहार के नेता अक्षम और अयोग्य हैं. मैं उन सभी अक्षम नेताओं को चुनौती दे रही हूं. मैं इस जंग को जीत कर रहूंगी और आपका साथ इसे ऐतिहासिक बना सकता है. पुष्पम कहती हैं कि बिहार का गौरव वापस लाने के लिए और सकारात्मक राजनीति के लिए मेरे साथ जुड़ें.

पुष्पम और उनकी पार्टी का भविष्य क्या होगा, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन इस तरह से उच्च शिक्षित लोगों का बिहार की राजनीति में आना सकारात्मक कदम माना जाएगा क्योंकि बिहार को भी अब पिछले 30 सालों से चली आ रही परंपरागत राजनीति से इतर एक नई तरह की राजनीति की जरुरत है.

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