सुशील मोदी होना भी कहां आसान बात है ? वफादारी इसे कहते हैं !

देश पिछले कुछ महीनों से नेताओं की महत्वाकांक्षा की अति देख रहा है. कम उम्र में बहुत कुछ पा जाने के बाद ज्यादा पाने की सनक उन्हें पार्टी और विचारधारा से अलग कर दे रहा है, ऐसे में लोगों को एक नजर बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी को आंख उठाकर जरुर देख लेना चाहिए.

Nitish has never been subservient to anybody: Sushil Modi hits out ...

महत्वाकांक्षी नहीं है सुमो

सुशील कुमार मोदी बिहार भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक हैं. पिछले 15 सालों से वो डिप्टी सीएम हैं. पिछले कुछ चुनावों में भाजपा ने बिहार में यह साबित किया है कि वो कम से कम जदयू से तो ज्यादा जनाधार रखती ही है लेकिन सुशील मोदी ने कभी जिद नहीं की कि उन्हें बिहार का सीएम बनना है. सुशील मोदी थोड़ी मेहनत और जिद से आगे बढ़ सकते थें लेकिन उन्होंने पार्टी हित को सर्वोपरी रखते हुए काम किया.

कभी भी कर सकते हैं राष्ट्रीय राजनीति

Sushil Kumar Modi on Twitter: "Met Narendra Modi today and ...

आज बिहार भाजपा के कई नेता भारत सरकार में मंत्री हैं. सुशील मोदी की भाजपा की केंद्रीय राजनीति में जबर्दस्त पैठ है. वाजपेयी आडवाणी युग से लेकर मोदी शाह युग में भी सुशील मोदी की स्वीकार्यता में कोई कमी नहीं हैं. वहीं संघ परिवार में भी सुशील मोदी की गहरी पकड़ है. सुशील कुमार मोदी जब भी चाहेंगे तब बिहार की राजनीति से आगे बढ़कर केंद्र की राजनीति में एक्टिव हो सकते हैं लेकिन उन्होंने उसी भूमिका को स्वीकार किया, जो उन्हें पार्टी ने दिया.

सिंधिया और पायलट जैसों को सीखना चाहिए

Sad to see 'erstwhile colleague' too being sidelined: Jyotiraditya ...

कम उम्र में ज्यादा पाने के बाद भी पार्टी को आंख दिखाने वाले उन युवा नेताओं को सुशील कुमार मोदी से जरुर सबक लेना चाहिए, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में कुछ न पाने की सूरत में भी कभी मां जैसी पार्टी को ब्लैकमेल नहीं किया. निश्चित तौर पर जब भी भाजपा का इतिहास लिखा जाएगा, सुशील कुमार मोदी का नाम एक वफादार सिपाही के तौर पर लिखा जाएगा.

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