राजद का इशारा साफ है, किस दल को कितनी सीटें देनी हैं, विस्तार से जानिए पूरा आंकड़ा

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बिहार में महागठबंधन में बवाल है. राष्ट्रीय जनता दल यानी आरजेडी इस बार ब्लैकमेलिंग बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोरचा सेकुलर, पूर्व केंद्रीय उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और सन आॅफ मल्लाह मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी यानी वीआईपी ने मिलकर राजद पर जबर्दस्त दबाव बनाया और राजद ने अपनी स्थापना के बाद पहली बार महज 19 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा.

यह एक इतिहास जैसा था, जब आधे से भी कम सीटों पर राजद को समझौता करना पड़ा. मालूम हो कि बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं.

पर शायद राजद अब ऐसा करने के मूड में नहीं है. वो हर कीमत पर इस बार विधानसभा की 150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. इसके अलावा वो कांग्रेस को 50 सीटें देना चाहती है, बाकी की बची 43 सीटों में उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी को निपटाना चाहती है. राजद को पता है कि ये तीनों दल इतनी सीटों पर मानेंगे नहीं और गठबंधन तोड़ने की धमकी देंगे.

राजद नेतृत्व चाहता भी यही है कि अब ये लोग महागठबंधन का साथ छोड़ दें. मांझी, उपेंद्र और मुकेश सहनी ये तीनों ही राजद के लिए बोझ की तरह बनते जा रहे हैं. राजद से जुड़े हुए बिहारी न्यूज के सूत्रों का कहना है कि राजद की इच्छा है कि वो अपने महागठबंधन में वामदलों और मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी को साथ लाए. इन दोनों दलों को 43 सीटें देना कहीं ज्यादा फायदेमंद हो सकता है…. बजाय कि उपेंद्र, मांझी और मुकेश सहनी को अपने साथ बनाए रखना.

राजद ने इन दलों में सेंधमारी की कवायद भी शुरु कर दी है. मधुबनी लोकसभा सीट से मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के उम्मीदवार रहे बद्री पूर्वे को राजद ने अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है. वहीं ज्यादा से ज्यादा कुशवाहा, मल्लाह और मुसहर समाज के नेताओं को अपनी ही पार्टी में जोड़कर अपने सामाजिक आधार और वोट बैंक में विस्तार की रणनीति पर राजद ने काम शुरु कर दिया है.

राजद के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह सोशल इंजीनियरिंग की राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाते हैं और राजद इसी दिशा में बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है.

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