महाराष्ट्र करणी सेना ने बिहार के पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज कराई लिखित शिकायत

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सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में प्रतिदिन एक नए खुलासे सामने आ रहे हैं. इधर यह केस बिहार सरकार बनाम महाराष्ट्र सरकार होता जा रहा है. महाराष्ट्र के राजनेता और बिहार के राजनेताओं की तरफ से बयानबाजी का दौर जारी है. ऐसे में अब मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में बिहार पुलिस के पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज की गई है. करणी सेना ने आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा है कि बिहार पुलिस के अधिकारियों का कार्यक्षेत्र मुंबई नहीं था. इसके बावजूद वे जांच के लिए चले आए.

करणी सेना की तरफ से कहा गया है कि उस केस को मुंबई ट्रांसफर कर देना चाहिए था. करणी सेना की तरफ से यह भी कहा जा रहा है कि उनके इस तरह से करने से महाराष्ट्र पुलिस की छवि धूमिल हुई है.

इधर सुप्रीम कोर्ट में केस ट्रांसफर को लेकर मंगलवार को सुनवाई हुई जिसमें महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बिहार पुलिस की कार्रवाई और सीबीआई जांच की बिहार सरकार की अपील के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा. सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि मान लीजिए कल कोई मुम्बई में कोई हिट रन केस हो जाये. अगर पीड़ित और आरोपी दोनों ये कहने लगे कि हमें मुम्बई पुलिस पसंद नहीं हो. जांच केरल या कोई राज्य की पुलिस करे, तब क्या होगा.

सिंघवी ने यह भी कहा है कि अब यह मामला बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र का नहीं है. अब यह केस ट्रांसफर का मामला नहीं है. इसमें अब सीबीआई जांच की बात है. उन्होंने कहा कि हमारी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सीलबंद कवर में दाखिल की गई है. अब बिहार ने अपने हलफनामे में कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत बिहार के रहने वाले थे. इस पर सिंघवी ने कहा कि घटना जहां पर हुई है उस राज्य की सहमति सीबीआई जांच के लिए जरूरी है. उन्होने कहा कि अपवाद यह है कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट अपनी ओर से भी सीबीआई जांच का आदेश दे सकता है. लेकिन ऐसा बहुत कम होता है.

बिहार सरकार के वकील मनिदर सिंह ने दलील देते हुए कहा कि मुंबई पुलिस ने इस मामले में घटना के इतने दिनों के बाद भी केस दर्ज नहीं किया. उसके बाद बिहार पुलिस इस मामले में आगे आई है. उनका कहना था कि अभी तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि एफआईआर पोस्टमार्टम से पहले ही हो जाना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले को रफा दफा करने के लिए इस तरह से किया गया है.

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