रघुवंश प्रसाद के पत्र पर सियासत तेज: मांझी ने पूछा नकारा बेटों के लिए कितने की लेंगे ब-लि

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राजद के कद्द्वार नेता रघुवंश प्रसाद के निधन के बाद उनके चिट्ठी पर सियासत शुरू हो गई है. उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और फिर उन्होंने पत्र लिखा है। इस पत्र के बाद बिहार में सियासी बयानबाजी की दौर चल पड़ी हैं और मांझी इसे आड़े हाथों ले रहे हैं. रघुंवश प्रसाद का इस्तीफा दिए जाने के बाद चिट्ठी लिखना साफ तौर पर राजद के खिलाफ और बिहर में उसकी छवि में गिरावट दर्ज करने के लिए पर्याप्त हैं लेकिन उनके गुजर जाने से के बाद जो राजनीती धीमी चल रही थी और राजद के तरफ से कुछ प्रयास करने में आता वह अब उल्ट हो गया और उनका पत्र तेजी से टूल पकड़ रहा है.

राजद के कार्यशैली और नेतृत्व से खफा रघुवंश प्रसाद पार्टी छोड़ने के बाद इस दुनिया को भी अलविदा कह गए लेकिन उनके उठाये गए यह कदम उन तमाम नेताओं को तेज आवाज और बल दे गई जो राजद से खफा हैं.

पूर्व सीएम जीतन राम ने पोस्टर वार किया हैं जिसमें रघुंवश प्रसाद के पत्र को आधार बनाया है और राजद पर हमला किया हैं. अभी हाल तक जीतन राम मांझी महागठबनधन में राजद के साथ रहे थे लेकिन कोई राह नजर नहीं आता देखा और अपने रास्ते मोड़ लिए। राजद से खफा मांझी ने लालू के दोनों लाल पर हलमा बोला हैं. हम के तरफ से जारी पोस्टर में लिखा है कि रघुवंश बाबू का अंतिम पत्र, अपने नाकारा बेटों को स्थापित करने के लिए और कितनों की बलि लेंगे, होटवार जेल सुप्रीमो।

बता दें कि मांझी ने राजद पर रघुवंश बाबू के जाने लेने का आरोप लगाया है जिसमें मांझी ने इस बात को आधार बनाया है कि लालू परिवार के तरफ से यह कहा गया कि सागर से एक लोटा पानी बाहर हो ही जायेगा तो क्या हो जायेगा। 32 सालो तक जिस पार्टी को उन्होंने सींचा और लालू के साथ रहे; उसके दिए इस बयान से रघुवंश प्रसाद को गहरा झटका लगा जिसे वे नहीं सह सके.

मांझी जदयू का दामन थम लिया है और एन दी ए में जगह पा ली हैं वहीँ चुनावी समय चूँकि नजदीक आ गया है और सीटों को लेकर राजनितिक पार्टियों बीच घमासान मच हुआ है। यह हाल कमोबेश एन डी ए और महागठबंधन दोनों में हैं. एन डी ए में सीटों को लेकर लोजपा और मांझी का मामला लटका पड़ा है।

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