नीतीश की पार्टी ने चिराग पासवान का खोजा काट, मांझी ने कहा JDU पर कुछ बोले तो मुझसे टकराना होगा

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बिहार की राजनीति में अगर लंबे समय तक राजनीतिक की बात करनी है तो आप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीति या फिर लालू यादव की राजनीतिक को नकार नहीं सकते हैं. ये दोनों ही पार्टियां ऐसी पार्टी है जो राज्य में सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटा सकती है. इसका सबसे बेहतरीन नमुना हमने 2015 विधानसभा चुनाव के समय देखा है. खैर वर्तमान में दोनों ही राजनीतिक पार्टियां अलग अलग गठबंधन में हैं. लेकिन दोनों ही पार्टिंया अपने अपने गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका निभा रहें है.

आपको बात दें कि पिछले कुछ दिनों से बिहार एनडीए के साथी लोजपा सुप्रीमो चिराग पासवान बिहार सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलते रहे हैं. नीतीश कुमार की योजनाओं पर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने प्रदेश में कोरोना और बाढ़ को लेकर भी सवाल उठाया था ऐसे में नीतीश कुमार ने अपना मास्टर स्टोक चलाते हुए जीतन राम मांझी को एनडीए का हिस्सा बनाया है. जिसके बाद से राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि नीतीश कुमार ने संगठन में दलित कार्ड खेला है जिससे की वह चिराग पासवान को शांत करा सकें.

हालांकि इधर एनडीए का हिस्सा बनने के बाद जीतन राम मांझी पूरी तरह एक्शन के मोड में हैं. उन्होंने कहा है कि चिराग पासवान जरा यह भी बताएं कि दलितों के नाम पर वोट की राजनीति करने वाले रामविलास पासवान ने आज तक दलितों के लिए क्या किया है. मांझी के इस बयान से यह साफ है कि अगर जदयू के खिलाफ अगर कोई बोलता है तो जीतन राम मांझी पहली लाइन में खड़े मिलेंगे.
आपको बता दें कि चिराग पासवान लगातार नीतीश कुमार के खिलाफ बोलते रहे हैं. उनके खिलाफ तो उन्होंने मोर्चा ही खोल दिया था. इतना ही नहीं उन्होंने कही दफा बिहार के मुख्यमंत्री बनने का दावा भी किया था. हालांकि चिराग ने कई दफा कहा था कि हमारा गठबंधन बीजेपी के साथ है न कि जदयू के साथ हैं.

जदयू और लोजपा के बीच पिछले दिनों बढ़ी तल्खी के बीच में जदयू के वरिष्ठ सांसद ललन सिंह ने चिराग पासवान को कालिदास बताते हुए कहा था कि ये एक ऐसा नेता है कि जिस डाली पर बैठे उसे ही काटने पर आमदा है.

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