रजक के विरोध और नीतीश के समर्थन में उतरें मांझी

अब ऐसा लगभग तय लगने लगा है कि पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी एक बार फिर से एनडीए के साथ जाने की तैयारी करने लगी है. मांझी के बयानों से तो कम से कम ऐसा ही लग रहा है. दो दिन पूर्व ही जदयू से बर्खास्त और राजद में शामिल होने वाले नीतीश सरकार के कैबिनेट मंत्री श्याम रजक के विरोध में और नीतीश कुमार के समर्थन में मांझी खुल कर उतर गए हैं.

दलित विरोधी नीतीश तो मंत्री कैसे !

पूर्व सीएम मांझी ने साफ तौर पर कहा कि अगर नीतीश कुमार दलित विरोधी थें तो श्याम रजक उनकी सरकार में मंत्री के तौर पर कैसे काम रहते रह गए ! चुनाव से ठीक पहले जब वो जदयू छोड़ राजद में चले गए और जदयू ने उन्हें मंत्रिपरिषद और पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया तब वो इस तरह की बातें कर रहे हैं, जिसे किसी भी प्रकार से सही नहीं कहा जा सकता है. मांझी ने बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि जब संसद में हिंदू कोड बिल पर उस वक्त के प्रधानमंत्री पंडित नेहरु एवं उनके अन्य सहयोगियों द्वारा विरोध हुआ था, तब बाबा साहेब ने नेहरु के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर एक नया मानक बनाया था. इतने दिनों तक नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में लाभ लेकर अब वो उन्हें दलित विरोधी बता रहे हैं.

एनडीए बनाना चाहती थी राज्यपाल

पूर्व सीएम ने कहा कि वो कोल्ड स्टोरेज की राजनीति नहीं करना चाहते. जब वो एनडीए में थें तब उन्हें राज्यपाल बनाने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने नहीं माना. उनके मना करने के बाद ही भाजपा नेता सत्यदेव नारायण आर्य को राज्यपाल बनाया गया था. मांझी ने कहा कि वो दलितों व वंचितों के कल्याण के लिए काम करना चाहते हैं. जो भी पार्टी या गठबंधन दलितों के कल्याण के लिए उनका साथ देगी तो वो उसके साथ आगे बढ़ कर काम करने को तैयार हैं. मांझी ने दोहराया कि वो निजी क्षेत्र में भी आरक्षण के पक्षधर हैं ताकी सभी कमजोर तबकों को समान अवसर मुहैया हो सके.

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