मठ मंदिरों की ज़मीन का ब्यौरा होगा ऑनलाइन

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बिहार के सभी मठ और मंदिरों का ब्यौरा अब ऑनलाइन होने जा रहा है, सिर्फ एक ही क्लिक पर बिहार के सभी मंदिरों और मठो से जुडी जानकारी मिल जाएगी बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड एक ख़ास वेबसाइट तैयार कर रहा है, इसी पर मठ मंदिरों के ऐतिहासिक महत्त्व के साथ रकबे की सम्पूर्ण जानकारी सार्वजनिक की जानी है इस पोर्टल को अब इस महीने के अंत तक ही लांच किया जा सकता है, जुलाई महीने से यह वेबसाइट अब पूरी तरीके से काम करने लगेगी.

धार्मिक न्यास बोर्ड से सम्बंधित सूबे के अब सभी मठ मंदिरों का पूरा ब्यौरा इस वेबसाइट पर मौजूद रहने वाला है इससे भी ख़ास बात यह है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी समय इस जानकारी को कहीं से भी देश सकेगा. वर्तमान समय की बात के तो बिहार में धार्मिक न्यास बोर्ड से अभी लगभग साढ़े पांच हज़ार मठ मंदिर जुड़े हुए है इनके पास ही 29 हज़ार एकड़ से ज्यादा ज़मीन मौजूद है, इनमे से ही बहुत सी ज़मीन पर विवादित या अवैध कब्ज़ा है.

फिलहाल अब ज़मीनों का सटीक आंकलन किया जा रहा है, अगले कुछ दिनों में इसकी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दे वर्तमान समय में किस मंदिर और मठ की कितनी ज़मीन अतिक्रमित है इसकी सटीक जानकारी जिला प्रशासन के पास भी नहीं है, राज्य सरकार ने अब सभी जिलों में मठ मंदिरों की अवैध कब्ज़े वाली ज़मीन को खाली करवाने का आदेश भी दे रखा है, इससे पहले ज़मीनों का डेटा अपडेट किया जा रहा है इसके बाद ही अब अवैध कब्ज़े वाली ज़मीन को अतिक्रमण से मुक्त करवाया जाएगा.

कुछ महीनो पहले ही मठ मंदिर की ज़मीन को धार्मिक संस्थान से बेदखल नहीं होने देने की बात राजस्व एवम भूमि सुधार मंत्री रामसूरत कुमार ने दी है उन्होंने ही साफ़ कहा था कि मठ मंदिर की ज़मीन के अतिक्रमण को हटाये जाने के लिए एक न्यायाधिकरण का प्राविधान किया गया है इस न्यायाधिकरण के आदेश पर अपील का भी प्राविधान है, यह भी व्यवस्था की गई है कि किसी भी हाल में अब ज़मीन पर बने निर्माण के किराए से मंदिर का जीर्णोधार कराया जायेगा. इसको लेकर बिहार भर में 1509 ज़मीनो को चिन्हित कर लिया गया है जिसके निबंधन का काम होने वाला है अब इस बारे में अंचलाधिकारी के माध्यम से धार्मिक न्यास बोर्ड के पास प्रस्ताव जल्द ही आने वाला है जिसके बाद ही अब इसका निबंधन होगा, ऐसे ज़मीन का रकबा 26 से 27 हज़ार एकड़ तक है.

वहीं अब सरकार के नए फैसले से यही उम्मीद की जा रही है कि इन ज़मीनों को सरकार जल्द ही अतिक्रमण मुक्त भी करवाया देगी और ज़मीन कहाँ कहाँ पर मौजूद है इसका ब्यौरा भी जल्द ही मिलने वाला है.

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