वो मौलाना जिन्होंने देश की आजादी के लिए पटना की 38 एकड़ जमीन दान कर दी

आज हम बात कर रहे हैं बिहार की महान विभूतियों में से एक महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और लेखक मौलाना मजहरुल हक की. मौलाना का जन्म 22 दिसंबर 1866 करे पटना जिले के बहपुरा निवार के एक बड़े मुस्लिम जमींदार परिवार में हुआ था.

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शकीना बेगम के कोख से जन्में मौलाना मजहरुल हक के पिता अब्दुल्लाह साहब ने उन्हें पढ़ने के लिए लंदन भेजा, जहां सभी मजहब के लोगों को एक मंच पर लाने के लिए उन्होंने अंजुमन इस्लामिया की स्थापना की.

1891 में पटना लौट कर मौलाना ने वकालत और सामाजिक काम शुरु कर दिया. 1897 में बिहार के सारण जिले में भीषण अकाल पड़ा. मौलाना से रहा नहीं गया, उन्होंने अपने निजी पैसे से लोगों की खूब मदद की और उन्हें राहत पहुंचाया.

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वर्ष 1916 में बिहार में होमरुल मूवमेंट शुरु हुआ और वो इसके अध्यक्ष बनें. महात्मा गांधी के नेतृत्व में जब असहयोग और खिलाफत आंदोलन शुरु हुआ तो मौलाना ने भी वकालत को त्याग दिया और पूरी तरह से भारत की आजादी की लड़ाई में कूद पड़ें.

जिस मौलाना को आज कांग्रेस को याद ...

देश में आजादी की लड़ाई तेज हो चुकी थी. बिहार में जगह के अभाव में यह संघर्ष कमजोर पड़ रहा था क्योंकि स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के लिए जगह का अभाव था. इस मुश्किल हालात में मौलाना सामने आए और पटना शहर की बेशकीमती 38 एकड़ जमीन राष्ट्र के नाम कर दी.

आज इसी जमीन पर सदाकत आश्रम, राजेंद्र म्यूजियम, ब्रजकिशोर विद्यापीठ आदि बनें हुए हैं. ऐसे महान देशभक्तों को बारंबार नमन.

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