टेस्ट मैच के सभी पांचों दिन बल्लेबाजी करने वाला विश्व का पहला बल्लेबाज

0
405

टेस्ट मैच के सभी पांचों दिन बल्लेबाजी करने वाला विश्व का पहला खिलाड़ी

बल्लेबाज जो था भारतीय क्रिकेट का सबसे स्टाइलिश खिलाड़ी

15 साल की उम्र में किया था फर्स्ट क्लास डेब्यू और 90 रन बनाकर चटकाए थे 3 विकेट

लॉफ्टेड शॉट खेलने वाले अपने जेनेरशन के पहले खिलाड़ी

एक टेस्ट मैच के पूरे 5 दिन बल्लेबाजी करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है जिसके नाम

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अकेले अपने दम पर दिलाई जीत

वह क्रिकेटर जिसने सुचित्रा सेन के शेम्पेन को वापस भेज दिया

वे उनकी चाल को याद करते हैं, उनके चलने का अंदाज, बिलकुल शांत. कॉलर उठा हुआ और चार्मिंग पर्सनालिटी, जिसके सामने फिल्म स्टार भी फीके थे. हैदराबाद के इस बल्लेबाज के लिए कहा जाता है कि एक बार इन्होने उस समय की मशहूर सुचित्रा सेन द्वारा भेजे गए शेप्मेन को ये कहकर ठुकरा दिया था कि यह किसी काम का नाम नहीं है अगर वो खुद ला कर ना दे. और सुचित्रा को खुद आकर वो देना पड़ा. वो सही मायने में जीवन में ऐसे गुजरे जैसे कोई हवा का झोंका हो.

आज के लेख में बात होगी भारत के एक ऐसे क्रिकेटर की, जो पेज 3 स्टार क्रिकेटर की तरह थे, जब पेज 3 दुनिया में आया नहीं था. 39 टेस्ट मैचों में 30.68 की औसत से 2056 रन और 9 विकेट, आंकड़े मुश्किल से उस प्रभाव को बता पाते हैं, जो खिलाड़ी का मैदान के अंदर और बाहर था. आज बात करेंगे भारत के पूर्व स्टार क्रिकेटर ML Jaisimha की. आज के अंक में हम एमएल जयशिम्हा की जिंदगी के कुछ जाने अनजाने और अनकही बातों को जानने की कोशिश करेंगे.

स्कूल के दिनों से जैसिम्हा के साथ खेलने वाले अब्बास अली टाइम्स ऑफ इंडिया को कहते हैं, वो अपनी साहसिक बल्लेबाजी से स्टेडियम को जिंदा कर देते थे साथ ही टीम की आवश्यकता अनुसार वो एक छोर को बंद भी कर देते थे.’ जयसिम्हा की यही खासियत थी, टीम की जरुरत के अनुसार खेलना. टेस्ट क्रिकेटर चंदू बोर्डे जयसिम्हा के लिए कहते हैं कि वो एक एलिगेंट प्लेयर थे, जिनका टाइमिंग बेहतरीन था. वो आगे कहते हैं, अपने जेनेरशन के वो पहले खिलाड़ी थे, जो लॉफ्टेड शॉट खेलते थे साथ ही हम उन्हें रिवर्स स्वीप के लिए भी याद करते हैं.

जयसिम्हा का टेस्ट करियर 12 वर्षों तक का रहा, 1959 से 1971 तक. अपने दूसरे टेस्ट में ही जयसिम्हा ने पूरे 5 दिन बल्लेबाजी करते हुए वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया था. 1960 में मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ जयसिम्हा ने अपनी बल्लेबाजी से मैच ड्रा करवाया था. इससे पहले किसी ने ऐसा कारनामा नहीं किया था. यहां तक कि उन्होंने अपने अंतिम टेस्ट मैच में भी सुनील गावस्कर के साथ 81 रनों की साझेदारी की थी और वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत को पहली टेस्ट सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई थी. कप्तान अजीत वाडेकर जयसिम्हा के कॉन्ट्रिब्यूशन को अपने ऑटोबायोग्राफी माय क्रिकेटिंग इयर्समें स्वीकार करते हैं, वो लिखते हैं, वह खड़ा रहा, उन बाउंसरों की बौछार के बीच और मैच को ड्रा करवाया था.’

जयसिम्हा के क्रिकेट जीवन का सबसे बेहतरीन क्षण आया था 1968 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, जब उन्होंने अकेले अपने दम पर भारत को असंभव जीत दिलाई थी, 74 और 101 रनों की पारी खेलकर. वो बीच सीरीज में इंजर्ड बीएस चंद्रशेखर की जगह आए थे. जयसिम्हा के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने की भी बड़ी दिलचस्प कहानी है दोस्तों, जिसका जिक्र हैदराबादबेस्ड एक स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट A Joseph Antony अपनी आत्मकथा ‘My Way’ में लिखते हैं,जय, एक रियल एस्टेट कंस्ट्रक्शन के धुरंधर के बेटे मद्रास से सिंगापुर से सिंगापुर से पर्थ फिर पर्थ से सिडनी और सिडनी से ब्रिसबेन तक का सफर तय किया. होटल पहुंचने के बाद पूरी रात ड्रिंक और फिर कप्तान टाइगर के साथ लंबी चर्चा चलती रही. उनके पास नेट्स में प्रक्टीस करने के लिए समय नहीं था. उनकी बल्लेबाजी देख, क्रिकेटरराइटर Jack Fingleton उनकी बड़ाई में लिखते हैं, करेक्ट अपराइट स्टांस, बल्ले का फ्री और फ्लावलेस बैकस्विंग और हर दिशा में स्ट्रोक. फुटवर्क तो अनुकरणीय था. इसलिए किसी के लिए ये आश्चर्य की ही बात थी, ऐसे बेहतरीन बल्लेबाज भारत की ओरिजिनल साइड में क्यों नहीं थे

सुनील गावस्कर अपनी ऑटोबायोग्राफी सनी डेजमें जयसिम्हा की व्याख्या देश के सबसे चतुर क्रिकेटिंग ब्रेन के तौर पर करते हैं. जयसिम्हा हैदराबाद के सबसे सफल कप्तान में से एक रहे, बस एक ही कसक रह गई कि हैदराबाद उनकी कप्तानी में कभी रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट नहीं जीत सकी. बतौर कप्तान जय के कद का अनुमान इस बात से लगाइए कि माक पटौदी उनकी कप्तानी में हैदराबाद के लिए खेले जबकि जयसिम्हा इंडिया के नवाब के अंदर खेले.

जयसिम्हा युवा खिलाड़ियों के लिए एक आदर्श थे और एक सच्चे मार्गदर्शक. महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर लिखते हैं, हैदराबाद पहुंचते ही ये बात साफ हो गई थी कि वह(यानी जय सिम्हा) सबके हीरो थे. युवा खिलाड़ी उनके जैसे चलने और बल्लेबाजी करने का अभ्यास करते थे. जब वो प्रक्टीस करने आए, सबकुछ छोड़ सब उन्हें देख रहे थे.”

जयसिम्हा से जुड़ा एक बड़ा ही मजेदार किस्सा है दोस्तों, वो 1985 श्रीलंका दौरा था, उस दौरे पर टीम इंडिया के मैनेजर रहे जय को टेनिस के एक गेम के लिए विकेटकीपर सदानंद विश्वनाथ ने चुनौती दी. विश्वनाथ को शायद ये मालूम नहीं था कि जय जूनियर नेशनल के फाइनलिस्ट रह चुके हैं और उन्होंने बिना ये जाने शर्त भी लगा दी. युवा विश्वनाथ को ना केवल हार मिली बल्कि वो शर्मिंदा होकर वेन्यू छोड़कर भाग गए. उस समय जयसिम्हा 46 के थे और सदानंद विश्वनाथ 23 के.

Satya Nadella

माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला लिखते हैं, एक समय की बात है मेरे पिता मेरे कमरे में कार्ल मार्क्स की एक पोस्टर टांग देते हैं, इसके जवाब में मां लक्ष्मी माता का पोस्टर टांग देती हैं. लेकिन जो पोस्टर मैं वास्तव में चाहता था, वो मेरे क्रिकेटिंग हीरो, हैदराबादी ग्रेट एमएल जयसिम्हा का.

60 साल की उम्र में लंग कैंसर की वजह से जयसिम्हा की मौत हो गई. उनकी मृत्यु के बाद परताब रामचंद ने लिखा है कि उनका पतला फिगर, जिसे उन्होंने अपने आखिरी दिन तक बनाए रखा, बचकाना अच्छा लुक, अनोखी चाल, ट्रेडमार्क रेशमी शर्ट और दुपट्टा, कलाई पर बटन वाली आस्तीन, कॉलर ऊपर की ओर ये सभी तुरंत ध्यान आकर्षित किया.” भारतीय क्रिकेट ने उन्हें संवर्धित स्टाइलिस्टकहा.

1961 में जयसिम्हा ने कानपुर में पाकिस्तान के खिलाफ पूरे दिन बल्लेबाजी की थी. 505 मिनटों तक बल्लेबाजी करने के बावजूद दुर्भाग्य से वो अपना शतक पूरा नहीं कर पाए. 99 रन पर खेल रहे जय सिंगल लेकर अपने शतक पूरा करना चाहते थे, इसी क्रम में रनआउट हो गए थे. आंकड़े जयसिम्हा के कद का सही प्रतिबिम्ब नहीं है. स्टाइलिश जयसिम्हा ने 15 साल की ही उम्र में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था और अपने डेब्यू मैच में ही उन्होंने आंध्र प्रदेश के खिलाफ 90 रनों की पारी खेली थी और 3 विकेट चटकाए थे. वहीं 18 जून, 1959 को इंग्लैंड के खिलाफ अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था.

3 मार्च, 1939 को सिकंदराबाद, हैदराबाद स्टेट में पैदा हुए एमएल जयसिम्हा के क्रिकेट करियर पर एक नजर उन्होंने भारत के लिए 39 टेस्ट मैचों में 2,056 रन बनाए, इस दौरान उनके बल्ले से 3 शतक और 12 अर्धशतक निकले. इंटरनेशनल क्रिकेट में उनके नाम 9 विकेट भी दर्ज हैं. जयसिम्हा ने 245 फर्स्ट क्लास मैचों में 37.44 की एवरेज से 13,516 रन बनाए, इस दौरान उन्होंने 33 शतक और 65 अर्धशतकीय पारियां खेली. वहीं इस दौरान उनके नाम 431 विकेट भी दर्ज हुए.

जयसिम्हा निश्चित रूप से भारत के उन क्रिकेटरों में शामिल हैं, जिन्हें सब कॉपी करना चाहते थे. भारत के सबसे स्टाइलिश खिलाड़ियों में उनकी गिनती होती है. क्या आपको भारत के इस स्टाइलिश खिलाड़ी के बारे में पता था ? कमेंट में हमें बताइए. चक दे क्रिकेट की पूरी टीम महान एमएल जयसिम्हा को कोटिकोटि नमन करती है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here