कैंसर की दवाओं को लेकर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, क्या मरीजों को मिलेगी राहत ?

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कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से निबटने के देश की सरकारी तंत्र नाकाम साबित हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब के अमृतसर स्थित गुरुनानक देव अस्पताल में कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली अधिकतर दवाएं खत्म चुकी है। इस कारण से कैंसर मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि अब उस अस्पताल में दवाएं उपलब्ध करा दी गईं हैं।

दवा के लिए पीएम को लिखना पड़ता है पत्र :

देश में कैंसर की दवा के लिए पीएम को चिट्ठी लिखी जाती है। तब जा कर मरीजों को महंगी दवा उपलब्ध हो पाती है। पिछले दिनों इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। कैंसर के दवाईयों के दाम अधिक होने से गरीब व मध्यम तबके लोग का मौत बिना ईलाज के ही हो जाता है। पीएम मोदी के पहल पर पिछले दिनों बिहार के खगड़िया जिले के गोगरी जमालपुर के रिक्शा चालक शंभू पासवान की पत्नी का इलाज संभव हो पाया। शंभु ने अपनी कैंसर से पीड़ित पत्नी की इलाज के लिए स्थानीय हॉस्पीटल में भर्ती कराया था। हॉस्पीटल में डॉक्टर द्वारा लिखी दवा नहीं मिली। आखिरकार शंभू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने का निश्चय किया। तब जाकर अस्पताल में दवा उलब्ध हो पाई।

भारत में कैंसर की दवा है काफी महंगी :

सांकेतिक फोटो

अब सवाल यह उठता है कि देश में हजारों की संख्या में कैंसर के मरीज हैं। सभी को इलाज के लिए अगर प्रधानमंत्री को पत्र लिखना पड़े तो मंगल पर पहुंचने वाले न्यू इंडिया के स्वास्थ्य विभाग के लिए शर्मनाक है। वर्तमान समय में भारत में कैंसर के मरीजों में गले, ब्रेस्ट, मुंह में कैंसर से पीड़ितों की संख्या अत्यधिक है। देश के बड़े-बड़े अस्पतालों में भी कैंसर से संबंधित दवा टेमोक्सीफेन, लेट्रोजोल व एनेस्ट्रॉजोल जैसी कीमती दवाएं नहीं हैं। भारत में लेट्राजोल टेबलेट का कीमत 1980 रुपए प्रति पैकेट है।

सभी अस्पतालों में मुफ्त में मिलेगी दवा :

देश में दवा के अभाव में हो रहे मौत पर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब कैंसर के मरीजों को सरकारी और गैर-सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में दवा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही जेनरिक में भी केंद्र सरकार ने कैंसर मरीजों के लिए दवा मुहैया कराने की दिशा काम करना शुरू कर दिया है। देश के लगभग हर अस्पतालों में अब जन औषधि केंद्र खोल कर केंद्र सरकार कैंसर की दवाओं को मुहैया कराने की दिशा में ठोस पहल करने जा रही है। यह प्रयास केंद्रीय रसायनिक एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से की जा रही है।

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