नरेंद्र मोदी सरकार की रिपोर्ट के अनुसार नीतीश कुमार का बिहार सबसे गंदा

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बिहार को लेकर स्वच्छता सर्वेक्षण रिपोर्ट 2020 जारी किया है जिसके अनुसार देश के सबसे गंदे बड़े शहरांं की सूची में बिहार में नंबर 1 स्थान हासिल किया है जबकि छोटे शहरों की सूची में बिहार का ही गया शहर नंबर वन पर है. ये पूरे बिहार के लिए शर्म की बात है. मालूम हो कि केंद्र सरकार ये सर्वेक्षण प्रत्येक वर्ष कराती है. वर्ष 2020 में भी ये सर्वेक्षण देश भर के 4242 शहरों में किया गया है. बड़े शहरों से यहां आशय 10 लाख से उपर की आबादी वाले शहरों से हैं. इनमें स्वच्छता के मामले में पटना सबसे नीचले पायदान पर है.

पटना और गया भाजपा का गढ़

बात करें पटना और गया की राजनीतिक स्थिति का तो ये दोनों शहर पिछले 25 सालों से भाजपा का गढ़ हैं. यहां के लोग भाजपा के सांसद और विधायक पर ही लगातार भरोसा जताते आ रहे हैं. वैसे तो बिहार में नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते हैं फिर भी यहां के नगर निगमों पर भी भाजपा का सर्वाधिक वर्चस्व रहता आया है. अब इसकी जिम्मेवारी किस पर है, ये जनता को खुद तय कर लेना चाहिए.

बिहार के इन शहरों का भी नाम

10 लाख से कम की आबादी वाले सर्वाधिक गंदगी वाले छोटे शहरों की इस सूची में बिहार के अन्य दूसरे शहरों के भी नाम हैं. जिनमें बक्सर, परसा बाजार, बिहारशरीफ और सहरसा का नाम शामिल है. आंकड़े आएंगे और जाएंगे लेकिन जिस तरह से इन शहरों का नाम गंदे शहरों में आ रहा है, यहां के नगर निगम के प्रतिनिधियों को नैतिकता के आधार पर स्वतः अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और जनता को भी वोट देने से पहले ये सोचना चाहिए कि कहीं आप जाति और धर्म के चक्कर में नालायकों और निकम्मों को तो अपना प्रतिनिध नहीं चुनने जा रहे हैं ? किसी भी नगर निकाय का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण काम होता है सफाई व्यवस्था. जब यही नही ं तो किस काम के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षद !

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