मुजफ्फरपुर कांड पर पढ़िए तंज कसता हुआ आलेख, युवा पत्रकार की कलम से

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इतिहास कभी आपको माफ़ नही करेगा मुज़फ़्फ़रपुर,क्योकि 34 मासूम की नही आपके बाबा गरीबनाथ की पावन भूमि की भी अस्मत लूटी है…..

जिस दिन लोग अपने मिट्टी के प्रति स्वभामिमानी स्वभाव खो देतें है समझिये ओ अपनी मिट्टी से प्यार करना भूल गए है और मुज़फ़्फ़रपुर के लोगो का ख्याल अब सवाभिमानी और मिट्टी से प्रेम वाला नही इसलिये मुज़फ़्फ़रपुर जाए तेल लेने इनको कोई मतलब नहीं है।

कोई कोई धधकने वाला आग भी अगर है तो उसको राजनीति की आग में बुझा दिया जाता है।

मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह मामले पर मैंने एक चीज गौर किया है शायद आपने भी किया होगा कि राज्य स्तरीय नेताओ की बात तो छोड़िये खुद मुज़फ़्फ़रपुर के सभी दल के नेता चाहे वह पक्ष हो या विपक्ष।
कोई भी नेता या व्यक्तिखुलकर विरोध नही कर रहा है इस कांड का और न इस पर कोई खास कुछ बोल रहा है।
संगठन से लेकर राजनीती पार्टी तक और यहां तक की आम लोग भी मौन है।
यहाँ तक की मुख्यमंन्त्री साहब भी………

अब क्या कारण है यह तो मैं नही बता सकता क्योंकि हर कोई अपने अपने नजरियों के अनुरूप से देख रहा है इस कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को।

कोई कह रहा है कि ये बहुत पहुँच वाला व्यक्ति है जैसा नवरुणा कांड में भी सुना था कि उसमे भी वैसा ही व्यक्ति का हाथ है और जब उसका कुछ नही हुआ ओ भी सीबीआई जांच कर तो इसका भी क्या होगा?

और कोई कहता है उच्च वर्ग के ये ऊंचे लोग है इसलिए ऊंचे लोग इनका विरोध क्यों करे और ओइसे भी मुज़फ़्फ़रपुर में ऊंचे लोग बहुत है क्योकि यहाँ नीचा कर्म कम होता है।……क्या सही कहे न। कुछ तो बोलिये नहीं तो सोचिये

कोई कहता है कि ये सारे नेताओ से लेकर भ्रष्ट लालची और सुविधाभोगी आम जनता का ये राज जानता है। क्योकि सबको बोटी का हिस्सा बाटता था।

मगर जो भी हो इन बातों से भी मुझे उतना दुःख नही मगर उन बातों से बहुत दुःख है होता है कि नेता तो नेता अफसर तो अफसर मिडिया तो मीडिया मगर जहाँ आम जनता भी अपना जमीर बेंच दे तो क्या वह समाज जिन्दा रह सकता है।हर कोई मौन है हर कोई शांत है यहाँ तक की कोई ऐ भी सवाल नही उठा रहा की क्या हुई नवरुणा के सीबीआई जांच का ।तीन साल से जाँच चल रहा था और फिर भी सीबीआई चार्जशीट दाखिल नही कर पाई और उस वजह से वह 6 अभियुक्त छूट भी गया।

और हमें अब ऐसा केस बड़े बड़े रसुखो के केस में आयेदिन देखनो को मिलता है।तो क्या ऐसा नही लगता कि अब सीबीआई बड़े बड़े अपराधियो के लिए सेफ जोन हो गया है।

सीबीआई जांच शुरू यानी बाहरी दवाब खत्म,अब अंदर क्या होगा कोई नही पूछने वाला।कुछ साल बाद पता चलता है कि फलना आदमी हुए रिहा क्योकि सीबीआई चार्जशीट दाखिल नही कर पाई तो फिर भाई इतना दिन सीबीआई कर क्या रही थी।

नही भाई…..ई बहुत गरबर झाला हो रहा है….अब सीबीआई में भी ……हमें तो भरोशा नही रहा।मेरे अनुसार किसी भी बड़े कांड को ठण्डा करने का यह सबसे सरल साधन गई।
मुझे तो डर लग रहा है कि कही 34 मासूम का भी हाल सीबीआई नवरुणा की तरह न कर दे।

जिस तरह विपक्ष भी सीबीआई की मांग कर सो गई है डर लग रहा है भाई डर लग रहा है….सब झालमेल है…. भाई सब गोलमाल है और सबका गोलमाल…है..

मगर कुछ भी कहिये लोगो की ये ख़ामोशी एक दिन इन लोगो का ही गोलमाल कर देगी…

मगर सबसे बड़ा सवाल जो मुज़फ़्फ़रपुर से है।
ये कैसी मुज़फ़्फ़रपुर की संस्कार है कि राज्य से बाहर की बेटीयो की अस्मत जब लूटती है तो हम बनावटीपन और सेल्फी आनंद के लिए सरेआम विरोध करते है मोमबत्ती जलाकर या पुतला दहन कर।जबकि हम उस दरिंदे को जानते भी नहीं होते।

लेकिन जिले के लोग आपके जिले में ही अस्मत लौटते है कइयों मासूम के
हम शान से नाच रहे है झूम झूम के..नही नहीं…ए पाप बाबा गरीबनाथ भी बर्दाश्त नही कर सकते की बाबा गरीबनाथ के नाम से जाने वाली इस धरती पर इतना बड़ा पाप कोई कैसे कर सकता है।

उस दरिंदे ने उस मासूमो की अस्मत नही लूटी है उसमें बाबा गरीबनाथ की पावन भूमि की भी अस्मत लूटी है।
नही ओ भी माफ़ नहीं करेंगे…..

मगर अचरज हु की मुज़फ़्फ़रपुर के लोगो ने कैसे माफ़ कर दिया….
मगर याद रखियेगा इस खामोशी पर आपको इतिहास कभी माफ नही करेगा…
चाहे आपको जितना माफ करना है कर लीजिए…लेकिन इज्जत से बड़ी मजबूरी कुछ भी नहीं हो सकती।
और नहीं तो सीधे सीधे यह घोषणा कर दीजिए की यह शहर हैवानो का शहर बन चूका है।जहाँ हर कोई हैवान है और यहाँ कोई किसी की चीख नही सुनता।

खैर छोड़िये आज इतना ही फिर कभी फुर्सत में और लिखेंगे थोड़े और बदलाव के साथ खैर कुछ विशेष बदलेगा भी नही इधर जाँच चलती रहेगी और उधर अपराधी बीमारी के नाम पर जेल से बाहर आकर हॉस्पिटल में ऐसी का मजा लेता रहेगा….फिर भी कुछ विशेष जरूर लेकर आएंगे।लेकिन अंत में सरकार के लिए भी एक सलाह छोड़ जाते है कि अब जैसा माहौल इस पश्चिमी वादी भोगविलाश संस्कृति में घुस चुकी भारत का हो गया है ।

उसके लिए भारत सरकार अपने जनता के लिए एक और नेक कार्य कर दे,कार्य यह की हर प्रखंड में सरकार एक सरकारी वेश्यालय बनाये और उसमे सरकारी वेश्यकर्मी सरकार बहाल करे और उसका वेतन भी सरकार ही दे क्योकि सबसे ज्यादा हवस की आग आजकल सरकारी बाबु में ही है।
और सरकार जिस तरह बालिका गृह का संचालन करवाती है ठीक उसी तरह वेश्यागृह भी चलाये और हवस के भुखरियो के लिए 100%सब्सिडी रखे।
क्या होगा कुछ थोड़ा फर्क पड़ेगा सरकारी खजाना पर मगर कई मासूमो की जिंदगी भी तो बचेगी न…

खोल दीजिये साहेब लोग खोल दीजिये ..आप लोगों के लिए भी ठीक रहेगा….
कद्रदान लोग आपलोग भी तो खामोखा बदनाम हो जाते है लैंसेसी वेश्यालय रहेगा ओ भी मुफ्त में सरकार के सौजन्य से तो फिर चिंता किस बात की है…जय जय रहेगी…

खैर छोड़िये…हर डाल पर उल्लू बैठा है अंजाम ये गुलिस्ता क्या होगा…

लेखकसंत राज बिहारी( लेखक युवा पत्रकार है और अपनी धारदार लेखनी से ज्वलंत मुद्दों पर चोट करते रहते है,लेखक मुजफ्फरपुर के ही रहने वाले है )

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