मुजफ्फरपुर की शाही लीची की यूरोप व अरब में बढ़ी जबरदस्त डिमांड

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बिहार के मुजफ्फरपुर के शहद का डिमांड यूरोप व् सऊदी अरब में काफी ज्यादा है. इसलिए देश विदेश में मुजफ्फरपुर का नाम लीची सिटी के रूप में मशहूर है. यहाँ सबसे ज्यादा लीची से शहद का निर्माण किया जाता है. लीची से बने शहद में कम वसा होने के कारण विदेशों में इसका प्रयोग मक्खन की जगह ब्रेड पर लगाकर खाने के लिए किया जाता है.

शहद उत्पादन के लिए पूरे मुजफ्फरपुर जिले में करीब 10 हजार मधुमक्खी पालक है. लीची से शहद उत्पादन का समय करीब 15 से 20 दिन का होता है. इतने ही दिनों में 2 बार शहद निकला जाता है. मुख्य रूप से मार्च का महीना शहद निकालने के लिए काफी अनुकूल माना जाता है. लीची से शहद निकालने के बाद सरसों, खरबूजा और जामुन से भी शहद  तैयार किया जाता है. लीची से लगभग 30 हजार टन शहद तैयार किया जाता है.

लीची उत्पादकों के पास प्रोसेसिंग यूनिट, रिसर्च सेंटर व् भंडारण की व्यवस्था नही होने के कारण दिल्ली, पंजाब व् राजस्थान स्थित विभिन्न कंपनियों को अपना कच्चा माल ही बेचना पड़ जाता है. ये कम्पनियां प्रोसेसिंग के बाद शहद की पैकिंग कर शहद को विदेश निर्यात कर देतीं हैं. शहद उत्पादकों को व्यवस्थाओं की कमी की वजह से अपने शहद को 50-70 किलो रूपए की दर पर बेचना पड़ता है वहीं कंपनियां इसी शहद को ग्राहकों को दुगनी दर पर बेचती हैं.

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