महागठबंधन की खुलने लगी है गांठ, विधानसभा चुनाव में NDA को होगा फायदा, जानिए कैसे

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बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक दल अपनी अपनी गोटियां सेट करने लगे हैं. विपक्ष जहा सत्ता पक्ष पर लगातार हमलावर हैं तो वहीं सरकार की तरफ से भी जवाब दिया जा रहा है. ऐसे में दोनों तरफ से आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. इधर महागठबंधन के दलों के बीच में इस समय जिस तरह से कड़वाहट हैं, उससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस बार होने वाले विधानसभा चुनाव महागठबंधन के लिए इतना आसान रह जाएगा. क्योंकि महागठबंधन में ज्यादातर पार्टियां एक दूसरे से नाराज चल रहे हैं ऐसे में नेता बनना और सभी को मनाना उसे खुश करना बहुत मुश्किल जान पड़ता है.

इधर एनडीए में तीन घटक दल हैं, बीजेपी, जदयू और लोजपा इन तीनों में पहले से ही सहमती बनी हुई है. बीजेपी के वरिष्ट नेताओं ने पहले ही नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा मान लिया है ऐसे में नेता कौन होगा इस पर तो बहस बंद हो गई है लेकिन अब बात रह गई सीटों को लेकर तो लोजपा ने अपनी सीटों के बारे में गठबंधन को बता दिया है ऐसे में अब बीजेपी और जदयू को बैठकर इस बात पर सहमती बनानी हैं कि कौन कहा और किस सीट से चुनाव लड़ेगा क्योंकि पिछली बार जदयू महागठबंधन के साथ चुनाव मैदान में थे. इस बे बीजेपी के साथ चुनाव मैदान में जाने वाले हैं ऐसे में इनके पास भी सीटों को लेकर खिंच तान हो सकती है लेकिन अब जदयू और बीजेपी ने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं. जिससे यह जान पड़ता है कि अब तक स्थिति ठीक ठाक चल रही है.

महागठबंधन में जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और वीआईपी पहले से ही अपनी सीटों को लेकर नाराज चल रहे हैं. कभी कभी कांग्रेस भी बड़े भाई और छोटे भाई का राग अलापने लगती है ऐसे में महागठबंधन में सब कुछ ठीक है यह कह नहीं सकते है. इधर महागठबंधन में सबसे बड़े दल के रूप में राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद ने जीतन राम मांझी के समन्वय समिति की मांग को लेकर कहा है कि हमलोग अपना काम कर रहे हैं. समय आने पर सब ठीक हो जाएगा. महागठबंधन में किसी स्तर पर बिखराव नहीं है. विधानसभा सीटों का सम्मानजनक ढंग से बंटवारा होगा. राजद के नेता भले ही सब कुछ ठीक होने का दावा करते हो लेकिन जीतन राम मांझी लगातार महागठबंधन का नेता और समन्वय समिति के गठन को लेकर सवाल खड़ा करते रहे हैं.

सीटों को लेकर असली लड़ाई महागठबंधन में जदयू कोटे की सीटों को लेकर जो पिछली बार जदयू को मिली थी उसी सीटों पर महागठबंधन के सभी साथियों की नजर बनी हुई है. पिछली बार जदयू को महागठबंधन में 101 सीट मिली थी. जबकी राजद के हिस्से भी इतनी ही सीटे थी. अब राजद, हम, रालोसपा, वीआईपी और कांग्रेस भी इन्ही सीटों पर दावा कर रही है. ऐसेमें सीटों के बंटवारे को लेकर आपसी सहमती नहीं बन रही है. इन सब के बीच में कांग्रेस के नेता ने जदयू की सीटों पर अपनी दावेदारी की बात कही है. अगर ऐसा होता है तो फिर महागठबंधन का पेंच और भी उलझात हुई प्रतित हो रहा है.

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