बिहार में NDA के लिए एक और अवसर, जानें पूरा ब्यौरा

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17वे लोकसभा चुनाव के नतीजे घोसित होने के साथ ही बिहार में सत्तारूढ़ राजग के घटक दलों जदयू, भाजपा और लोजपा के नेताओं-कार्यकर्ताओं के लिए बहुत सारे नए अवसर खुल चुके हैं। विधायकों, विधान पार्षद के लिए राज्य मंत्रिपरिषद में चुने जाने, विधानसभा-विधान परिषद् के खाली पदों पर उनके लिए अवसर हैं। लम्बे वक़्त से बोर्ड निगमों के अध्यक्ष, सदस्य के खाली पदों को भी भरने का ये राजग सरकार के लिए अवसर है। गौरतलब है की राज्य सरकार के तीन मंत्री राजीव रंजन उर्फ़ लल्लन सिंह, दिनेश चंद्र यादव और पशुपति कुमार पारस लोकसभा के चुनाव में सफल हो गए हैं। फिलहाल, बिहार कैबिनेट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित 28 सदस्य हैं। इनमें से तीन के त्यागपत्र सौंपने के बाद ये संख्या सिर्फ 25 रह जाएगी।

नियमानुसार, मंत्रिमंडल में कुक सदस्य की तादाद 243 का 15 प्रतिशत तक अर्थात मुख्यमंत्री साहिब 36 सदस्य हो सकते हैं। इसके अनुसार, 11 सदस्य की जगह खाली हो गई है। कम से कम आधा दर्जन नए सदस्यों को मंत्रिमंडल में सम्मिलित किए जाने की आशंका जताई जा रही है। पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के त्यागपत्र के बाद फिलहाल कोई महिला मंत्रीपरिषद् में नहीं है। उम्मीद है कि महिला विधायक को विस्तार में अवसर जरूर प्राप्त होगा। पारस के त्यागपत्र सौंपने के बाद लोजपा कोटे से भी कैबिनेट में कोई नहीं बचेगा।

12 विधायकों में 8 हार गए

इस मर्तबा जदयू के 4 विधायक, राजद के 5, कांग्रेस के 2 जबकि ‘हम’ के इकलौते विधायक जीतन राम मांझी लोकसभा के चुनाव मैदान में खड़े हुए थे। इन 12 विधायकों में 8 तो हार गए, लेकिन जदयू के चारों विधायक दिनेशचंद्र यादव (सिमरी बख्तियारपुर), अजय मंडल (नाथनगर), गिरधारी यादव (बांका), जबकि दरौंदा की विधायक कविता सिंह के संसद पहुँच जाने से इन चारों सीट पर उपचुनाव होंगे। जदयू के चार नए नेताओं को विधानसभा पहुँचने का अवसर मिल सकता है। वहीँ दूसरी तरफ, कांग्रेस के किशनगंज विधायक मो. जावेद के यहीं से सांसद बन जाने से यहाँ पर विधानसभा उपचुनाव में एक नए नेता को अवसर मिलेगा।

दो सीटों पर विधान परिषद में भी अवसर

विधान पार्षद राजीव रंजन उर्फ़ लल्लन सिंह (जदयू) एवं पशुपति पारस (लोजपा) के लोकसभा चुनाव जीतने पर विधान परिषद् की दो सीटों पर उपचुनाव होंगे। 6 मई 2020 तक लल्लन सिंह का विधान परिषद् में कार्यकाल है, तथा 23 मई 2020 तक पशुपति कुमार पारस का कार्यकाल है। अभी विधान परिषद् की दो सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया बरक़रार है। ऐसा माना जा रहा है कि इनमें एक जदयू और एक भाजपा नेता को अवसर प्राप्त होगा।

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