मांझी और ओवैसी के साथ आने की खबरें बाजार में !

बिहार में एक नए सियासी समीकरण का जन्म हो सकता है. ऐसी खबरें आ रही है कि महागठबंधन में अपनी उपेक्षा से नाराज पूर्व सीएम जीतन राम मांझी बिहार में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकते हैं जो महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा सकता है. माना जा रहा है कि अगर मांझी को महागठबंधन यूं ही उपेक्षित करता रहा तो वो ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो बिहार में दलित मुस्लिम गठजोड़ का एक नया स्वरुप सामने आ सकता है. वैसे भी ओवैसी की पार्टी ने बिहार की 32 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है.

Jitanram manjhi said dalit become next cm of bihar

दलित मुस्लिम समीकरण पर रहेगा जोर

बिहार में दलितों और मुसलमानों की कुल आबादी 32 प्रतिशत के आसपास है. अगर ये दोनों वोट बैंक एक साथ आ जाते हैं तो निश्चित तौर पर एक दिलचस्प खेल देखने को मिल सकता है. इसमें कोई शक नहीं कि पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के मन में दुबारा सीएम बनने की इच्छा हिलोरे मारती रहती है. ऐसे में अगर ओवैसी ने मांझी को सीएम उम्मीदवार बनाने पर सहमति व्यक्त कर दी तो राजनीति का एक नया अध्याय बिहार में शुरु हो सकता है. पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मांझी के नाम पर दलित एकजुट हो जाएंगे ? क्या उन्हें अपने स्वजातीय मुसहर समाज के अलावा पासवान, रविदास, रजक आदि वर्गों का वोट मिल जाएगा ?

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ओवैसी के साथ मुस्लिम नौजवान !

जिस प्रकार से हिंदुत्व के नाम पर युवाओं की बड़ी जमात भाजपा का साथ देती है, ठीक उसी प्रकार से युवा मुस्लिम भी ओवैसी के प्रति आकर्षित रहते हैं. बिहार के मुस्लिम नौजवानों में भी ओवैसी का जबर्दस्त क्रेज है. यही वजह रही कि सीमांचल की किशनगंज विधानसभा उपचुनाव में जीत दर्ज कर एआईएमआईएम ने बिहार विधानसभा में अपनी एंट्री कर ली है. इसके बाद से बड़ी संख्या में बिहार के मुस्लिम नौजवान ओवैसी के साथ जुड़ने लग हैं क्योंकि ओवैसी की स्पीच उनके मन को मोह लेती है.

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