23 अगस्त से NHM कर्मी जाएंगे हड़ताल पर, प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा असर

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प्रदेश के एनएचएमकर्मी राज्य के रवैया से काफी नाराज हैं. उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 23 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया हैय. इधऱ बिहार राज्य सावस्थ्य संविदा कर्मी संघ ने आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्षो से एनएचएमकर्मियों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है. उन्होंने कहा है कि सरकार हमारे साथा सौतेला व्यवहार कर रही है. वह झूठा आश्वासन दे रही है. बताया जा रहा है कि इस अनिश्चित कालीन हड़ताल में हेल्थ मैनेजर, हॉस्पिटल मैनेजर, बीसीएम, डीसीएम, अकाउंटेंट समेत कई प्रकार के कर्मी हैं. कोरोना काल में इनके हड़ताल पर जाने के बाद से स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका सीधा असर दिखेगा.

इन एनएचएमकर्मियों की 6 मांगे हैं. आयुष चिकित्सक के तर्ज पर एनएचएमकर्मियों की वेतन वृद्धि, एनएचएमकर्मियों का प्रत्येक वर्ष 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि राज्यांश मद से करने, एनएचएम कर्मियों की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को 25 लाख रुपये भुगतान करने, पब्लिक हेल्थ मैनेजमेंट कैडर का गठन करने, ईपीएफ का भुगतान करने, कोविड 19 में 1 माह का अतिरिक्त वेतन भुगतान करने और एनएचएम कर्मियों के तबादले पर सहमति देने की मांग है.

आपको बता दें कि पिछले महीने एनएचएम कर्मियों ने भी हड़ताल किया था और अल्टीमेटम भी दिया था. लेकिन आनन-फानन में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और राज्य स्वास्थ्य समिति ने वार्ता का भरोसा देकर हड़ताल को तोड़वाया था. इसके बाद अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि 1 महीने के भीतर कमिटी गठित कर सभी मांगे पूरी कर ली जाएगी. लेकिन एक माह पूरे होने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है. इससे आहत होकर एक बार फिर से एनएचएम कर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है.

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