नीतीश कुमार के बेटे निशांत के जन्मदिन पर विशेष,सत्ता की छिना-झपटी में क्यों नहीं दिखाई देते नीतीश कुमार के बेटे निशांत

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वैसे तो पुरे हिंदुस्तान में ही वंशवाद की राजनीती अपनी परिकाष्ठा पर है. लेकिन बिहार की राजनीती का परिवारवाद हमेसा से ही सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना रहता है. लोक जनशक्ति पार्टी के संयोजक रामविलास ने पासवान ने जहाँ यह खुल्ला एलान कर दिया की अब उनके बेटे चिराग पासवान ही लोजपा के कर्ता-धर्ता होंगे। वही पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के दोनों बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी 2015 में जीती महागठबंधन के कैबिनेट में तेज प्रताप स्वास्थ्य मंत्री बने तो वही लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव बिहार के उपमुख्यमंत्री रह चुके है. और अब 2020 विधानसभा चुनाव में राजद के मुख्यमंत्री उम्मीदवार है.

लेकिन लगातार 15 सालों से बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे नीतीश कुमार के बेटे बिहार की राजनीती और सत्ता की छिना -झपटी में कही दिखायी नहीं देते. नितीश कुमार के एकलौते बेटे निशांत कुमार बिहार के लिए किसी मिस्ट्री से कम नहीं है. बिहार के इतने बड़े नेता के बेटे होने के बावजूद वह लाइम-लाइट से दूर ही रहते है. आज जहाँ सभी युवा सोशल मीडिया पर व्यस्त है वही मुख्यमंत्री के  निशांत कुमार के बेटे का एक छोटा सा वीडियो भी सोशल मीडिया पर आपको खोजने से नहीं मिलेगा.

नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में इस बात पर विचार-विमर्श चल रहा है की नीतीश कुमार के बाद जदयू का नेता कौन होगा? उसी समय नीतीश कुमार के बेटे निशांत यह एलान कर देते है की वह राजनीती में नहीं आएंगे. जी हाँ आपने बिलकुल सही सुना नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने यह साफ कह दिया है की उन्हें राजनीती का कोई ज्ञान नहीं और ना ही उन्हें राजनीती में कोई दिलचस्पी है. वह अपना जीवन अध्यात्म की तरफ ले जाना चाहते है. निशांत कुमार के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है की नीतीश कुमार के पिता कविराज राम लखन सिंह से शुरू हुई उनके परिवार की यह सामाजिक और राजनितिक यात्रा नीतीश कुमार के बाद समाप्त हो जाएगी. नीतीश कुमार के पिता और निशांत के दादाजी कविराज राम लखन सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी थे और आधुनिक बिहार के संस्थापकों में से एक महान गांधीवादी बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिन्हा के बहुत करीब थे

नीतीश कुमार के बेटे निशांत का जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था. BIT MISHRA से निशांत ने इंजीनियरिंग में स्नातक किया है. निशांत भले ही राजनीती में नहीं है लेकिन चल- अचल सम्पति के मामले में वह अपने पिता से बहुत आगे है. 2019 रिपोर्ट के अनुसार नीतीश कुमार की कुल चल-अचल सम्पति जहाँ 56 लाख रूपए है. वही उनके एकलौते बेटे निशांत की चल-अचल सम्पति नीतीश कुमार से 4 गुना ज्यादा 2 करोड़ 70 लाख रूपए है.

निशांत मीडिया से बात नहीं करते, वह किसी सामाजिक कार्यक्रम में भी जाना पसंद नहीं करते और ना ही पिता के साथ किसी राजनितिक रैली में ही शामिल होते है. एक तरफ जहाँ उनके पिता नीतीश कुमार अपने विरोधियों पर कटाक्ष कर उनकी बोलती बंद करा देते है वही इसके ठीक उलट उनके बेटे निशांत शांत रहते है और राजनितिक शोर-गुल से दूर रहना ही पसंद करते है.

आज जबकि परिवारवाद की बात बेमानी हो चुकी है और छोटे-बड़े हर नेता की अगली पीढ़ी स्वयं को राजनीति में स्थापित करने में लगी है, ऐसे में राष्ट्रीय कद के एक नेता – जो किसी सत्ताधारी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लगातार 15 सालों से बिहार जैसे राज्य के मुख्यमंत्री हों उसका पुत्र यह कहें कि उनकी राजनीति में जाने की कोई इच्छा नहीं है, तो आज के समय में इस पर यकीं करना थोड़ा कठिन है. लेकिन हम ढूंढ़ें तो अवसारवाद की पराकाष्ठा के दौर में भी ‘अपवाद’ मिल जाते हैं. जी हाँ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार ऐसे ही एक ‘अपवाद’ हैं.

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