चिराग के बाद अब रामविलास ने नीतीश कुमार की खिलाफत की !

लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान के बाद अब उनके पिता और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खिलाफत कर दी है. रामविलास पासवान भी अभी बिहार विधानसभा चुनाव कराए जाने के पक्ष में नहीं हैं. रामविलास पासवान ने एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि बिहार में अभी चुनाव टालना ही बेहतर होगा. वहीं बिहार के सीएम नीतीश कुमार किसी भी कीमत पर समय पर चुनाव कराने पर अड़े हुए हैं.

लोजपा नहीं चाहती अभी चुनाव

पासवान ने कहा कि चुनाव में लाखों लोगों की मदद लेनी पड़ती है. लाखों की संख्या में शिक्षक पोलिंग अफसर होते हैं, लाखों की संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती होती है. बिहार में अभी कोरोना कितनी दूर तक जाएगा, संक्रमितों की संख्या कितनी ज्यादा बढ़ेगी, ये कोई नहीं जानता, ऐसी परिस्थिति में लोजपा बिहार विधानसभा चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है.

गरीबों की जान जोखिम में मत डालो

रामविलास पासवान ने कहा कि विधानसभा चुनाव टालने की वजह से क्या राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा या फिर कोई दूसरा कदम उठाया जाएगा, ये मुझे नहीं पता लेकिन गरीबों की जान जोखिम में नहीं डाला जाना चाहिए. जब पासवान ने यह पूछा गया कि सत्ताधारी जदयू अभी ही चुनाव चाहता है तो पासवान ने कहा कि हो सकता है कि जदयू ने कोई सर्वे कराया होगा लेकिन हम इसके बारे में कोई टिप्पणी करना नहीं चाहते हैं.

बिहार में इलाज का अभाव

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को दिल्ली की तर्ज पर बिहार पर भी ध्यान देना चाहिए. बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था सही नहीं है. यहां अब भी इलाज का अभाव है. यह पूछे जाने पर कि भाजपा जदयू अपनी सरकार की तुलना राजद के 15 साल के शासनकाल से करना चाहती है, इस पर पासवान ने कहा कि ये चुनाव के वक्त की बात है. फिलहाल तो हमें कोरोना और बाढ़ से मुकाबले पर ध्यान देना चाहिए.

मैं, नीतीश और लालू पास्ट हो चुके

जब रामविलास पासवान से यह पूछा गया कि क्या आप चिराग पासवान को सीएम पद का उपयुक्त उम्मीदवार मानते हैं तो उन्होंने कहा कि लोजपा को किसी भी प्रकार की कोई जल्दबाजी नहीं है. भविष्य नई पीढ़ी का है. मैं खुद, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद अब पास्ट होते जा रहे हैं. चिराग में नेतृत्व की पूरी क्षमता है. खुद पीएम मोदी यह बात कह चुके हैं लेकिन सच्चाई यह है कि सीएम की कुर्सी किसी पार्टी के नहीं बल्कि जनता के हाथों में है.

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