बिहार के इस जिले में डेढ़ लाख बाढ़ पीड़ितों पर मात्र 20 सरकारी चूल्हे जल रहे हैं

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उत्तर बिहार की ज्यादातर नदियां उफान पर है. प्रदेश के 10 जिले के 8 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं. मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ से घिरी करीब डेढ़ लाख आबादी के लिए शनिवार को महज 20 सरकारी चूल्हे जले. बाढ़ पीड़ितों का पेट भरने की यह कोशिश ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ है. आपको बता दें कि शनिवार शाम को जिला प्रशासन द्वारा यह कहा गया था कि सभी समुदायिक किचन शुरू कर दिया जाएगा.

डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने गायघाट में छह जगह पर सामुदायिक किचन शुरू करने का आदेश समीक्षा में दिया था. लेकिन बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा यह रही कि सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित शिवदाहा में ही शनिवार की दोपहर तक सामुदायिक किचन शुरू नहीं हो पाया. हालांकि शुक्रवार की रात से लदौर के रजुआटोल, बरूआरी के पंजाबी चौक व केवटसा के मिश्रौली मिडिल स्कूल में सामुदायिक किचन शुरू कर दिया गया. शुक्रवार को सामुदायिक किचन में चावल व आलू सोयाबीन की सब्जी बनी, तो शनिवार को खिचड़ी लोगों को दिया गया.

बोचहां में बूढ़ी गंडक से भारी तबाही में लोगों के घिरने के बावजूद अभी तक सामुदायिक किचन शुरू नहीं किया गया है. बूढ़ी गंडक व पुरानी बागमती के विकराल रूप से पूरा प्रखंड बाढ़ की चपेट में है. इस बीच अंचलाधिकारी के छुट्टी पर चले जाने के कारण राहत कार्य ठप है. डीएम ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को ही सीओ का चार्ज दिया है. बीडीओ सुभद्रा कुमारी ने बताया कि वे आज से व्यवस्था देखेंगी.

साहेबगंज के बाढ़ प्रभावित रूप छपरा पंचायत में तिरहुत तटबंध पर शनिवार को तीन, हुस्सेपुर में दो तथा हुस्सेपुर रत्ती में एक जगह पर सामुदायिक किचेन की शुरुआत की गई है. किचन से लोगों को शुक्रवार को चावल दाल व सोयाबीन आलू की सब्जी मिली थी. शनिवार को भी भोजन की तैयारी में सभी जूटे थे. लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग व साफ-सफाई का खयाल यहां भी नहीं रखा गया था.

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