जानिए, पंचायतों को मिलता है कितना बजट

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बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मीयां तेज हो गई है. निर्वाचन आयोग से लेकर जनप्रतिनिधि तक चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. ऐसे में आइए एक नजर डाल लेते हैं पंचायतों को मिलने वाले बजट के बारे में………

हमारे देश में 73 वें संविधान के लागू होते ही ग्रामीण भारत में पंचायती राज संस्थाओं का रूझान बढ़ गया था. इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि पंचायत राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा मिलना. आपको बता दें कि वर्तमान में गांव के विकास के लिए पंचायतों को करोड़ों रुपये सरकार देती है. इसके साथ ही गांव के विकास के लिए सरकार द्वारा ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जिला परिषद तक के लिए बजट बनाती है. 73 वें संविधान संशोधन के तहत अनु्च्छेद 280 में, केंद्र के वित्त आयोग की तर्ज पर भारत के सभी राज्यों में राज्य वित्त आयोग की स्थापना की गई है. जिसका उद्देश्य पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना है. पंचायतों के विकास के लिए धन उपलब्ध कराने के लिए वार्षिक बजट का प्रावधान है. जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का भी समुचित विकास हो सके.

 

आईए अब जान लेते हैं पंचायतों का बजट कैसे तैयार होता है…..

73 वें संविधान संसोधन के तहत पंचायतों को 29 कार्य सौंपे गए हैं. पंचायतों को सौपें गए 29 कार्यों में से वार्षिक बजट बनाना एक मुख्य कार्य है. ग्राम पंचायत द्वारा बनाए जाने वाले वार्षिक बजट को बजट पंचायत कहा जाता है. पंचायत बजट पर विचारविमर्श कर सिफारिश कर ग्रामसभा का कार्य निर्धारित किया गया है. ग्रामसभा में वार्षिक लेखाजोखा, बजट एवं पिछले साल का विभिन्न कार्यक्रमों पर किए गए खर्च पर चर्चा ग्राम सभा में करने का प्रावधान है. इस बजट के माध्यम से पंचायत के सभी कार्यों एवं प्राप्तियों का आकलन किया जाता है. यह वजट इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इस बजट का प्रस्ताव ग्राम सभा के माध्यम से किया जाता है. जिसमें ग्राम सभा के सदस्यों की भागीदारी होती है. इसके साथ ही ग्राम सभा के सदस्यों को वित्तीय वर्ष की शुरुआत के विकास कार्यों की जानकारी लेने का पूरा अधिकार है.

पंचायती राज संस्थाओं को मुख्यतः तीन तरह से धन की प्राप्ति होती है.

सबसे पहले बात सरकार की ओर से होने वाले धन की प्राप्ति के बारे मेंइसमें सबसे पहले बात वार्षिक बजट के रूप में…. उसके बाद योजनाओं के रूप में

वार्षिक बजट में केंद्र और राज्य दोनों बजट मुहैया कराती है. ग्राम पंचायतों को विकास कार्य के लिए केंद्र सरकार केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर बजट देती है. इस बजट की धनराशि सीधे ग्राम पंचायतों के खातों में जमा होती है.

अब बात राज्य से प्राप्त होने वाली धनराशि के बारे में….

पंचायतों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करने के लिए संविधान अनुच्छेद 243(I) में राज्य वित्त आयोग का गठन करने की व्यवस्था की गई है. राज्य वित्त आयोग समयसमय पर पंचायती राज संस्थाओं की आर्थिक स्थिति की समीक्षा कर राज्य की संचित निधि से विभिन्न पंचायती संस्थाओं को धन आवंटन करती है…………. इसके बाद……….. सांसद और विधायक निधि से प्राप्त होने वाली धनराशि….. सांसद और विधायक भी अपनी निधि से कुछ धन पंचायतों की वित्तीय सहायता के लिए प्रदान करते हैं.

अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाली धनराशि जैसेग्रामीण विकास, कृषि विभाग या अन्य विभागों से भी सहायता मिलती रहती हैं.

योजनाओं द्वारा मिलने वाली धन राशि…….

ग्राम विकास और जन कल्याण से संबंधित केंद्र एवं राज्य प्रायोजित अनेक योजनाएं पंचायतों द्वारा संचालित हो रही हैइन योजनाओं का प्रावधान केंद्र एवं राज्य सरकारें अपने बजट में करती है. जैसे– मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम), राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, केंद्र व राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित अन्य योजनाएं.

सभी राज्यों में जिला परिषद सबसे उपरी पंचायत निकाय है. शासन की दृष्टि से जिला सबसे महत्वपूर्ण इकाई है. केंद्र या राज्य सरकारों से चलकर सभी योजनाओं का क्रियान्वयन जिले स्तर से ही होता है. इसके बाद बजट का वितरण ब्लॉक और ग्राम पंचायतों में होता है.

आइए जान लेते हैं पंचायतों में बजट का निर्धारण किस तरह से होता है……..

जिला परिषद को बजट का 5% प्रतिशत की राशि खर्च करने के लिए दी जाती है. पंचायत समितियों को 20% प्रतिशत की राशि दी जाती है.. ग्राम पंचायतों को शेष 75% प्रतिशत राशि खर्च करने के लिए दी जाती है……….

अब बात पंचायतों द्वारा मिलने वाले धन के बारे में….

पंचायतें आज भी सरकारी बजट और अऩुदान पर ही निर्भर हैं इसीलिए 73 वें संविधान संशोधन में पंचायतों को वित्तीय स्वायत्तता की कमी को पूरा करने के लिए स्थानीय कर के माध्यम से राजस्व जुटाने की शक्ति प्राप्त है.

सम्पत्ति कग्राम सभा की जमीन व तालाबों को पट्टे पर देकर यह कर वसूली जा सकती है.

सार्वजनकि शौचालय पर यह कर लगाई जा सकती है. यदि उसकी सफाई का काम ग्राम पंचायत करेगी.

बाजार करग्राम पंचायत के अधीन लगने वाले हाट बाजारों पर यह कर लगाया जा सकता है.

जल करयदि ग्राम पंचायत जल की व्यवस्था करती है, तो यह कर लगा सकती है.

आपको बता दें कि ग्राम पंचायत हाट, बाजार, मेला आदि से राजस्व की बसूली कर सकता है लेकिन अभी यह प्रावधान व्यावहारिक रूप में नहीं हो रहा है. इस संबंध में सरकार द्वारा नियमावली नहीं बनाई गई है जिस कारण कर लगाने का अधिकार व्यावहारिक रूप धारण नहीं कर सका हैसंक्षेप में कहें तो पंचायतें अपनी वित्तीय व्यवस्था के लिए ज्यादातर सरकारी अनुदान और योजनाओं पर निर्भर हैं. जबकि पंचायती राज अधिनियम में पंचायतों को अपने क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की टैक्स वसूलने का अधिकार है. जागरूकता व राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव के कारण पंचायत प्रतिनिधि इसे वसूलने में रूचि नहीं लेते हैं. जबकि सुदृढ़ आर्थिक व्यवस्था के लिए पंचायत द्वारा लगाए जाने वाले कर को और अधिक कारगार बनाने की जरूरत है. आपको बता दें कि पंचायतों को कोई निश्चित राशि नहीं दी जाती है. लेकिन समय समय पर पैसे कम होने पर या किसी विशेष स्थिति में केंद्र और राज्य के द्वारा अतिरिक्त बजट जरूर दिया जाता है. जैसा की हमने कोरोना महामारी के दौरान देखा था.

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