जानिए बिहार के सपूतों के बारे में जिन्होंने पटना सचिवालय पर फहराया था तिरंगा

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देश इन दिनों आजादी का 75 वां साल मना रहा है. ऐसे में पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. इन दिनों पूरे देश में हर घर में तिरंगा लगाने की बात कही गई है. ऐसे में आज हम जानेंगे बिहार के उन सपूतों के बारे में जिन्होंने अपने देश के लिए हंसते-हंसते कुर्वानी दे दी. वह साल था 1942 का जब देश में महात्मा गांधी के आह्वान पर अंग्रेजों से भारत छोड़ों आंदोलन की धूम थी. यानी की पूरे देश में लोग अंग्रेजों को देश से बाहर करने के लिए लड़ाई लड़ रहे थे. ऐसे में बिहार के लोगों ने भी अपने हिस्से से योगदान देना शुरू कर दिया. ब्रिटिश सरकार से लोहा लेने के लिए बिहार के लालों ने अपनी जान की कुर्वानी दे दी. आज हम बिहार के जिस घटना के बारे में बताने जा रहे हैं यह घटना 11 अगस्त 1942 की है जब बिहार के सपूतों ने अंग्रेजों से लड़ाई करते हुए पटना सचिवालय के ऊपर झंझा फहराने में कामयाब रहे और अंग्रेजों के द्वारा चलाए गए गोली से वे शहीद हो गए.

आपको बता दें कि पटना सचिवालय में बिहार के जिन लालों ने अपने जान की आहुती दी उसमें सात युवा थे. साल 1942 में महात्मा गांधी के आह्वान पर इन सपूतों ने 11 अगस्त के दिन दो बजे पटना के सचिवालय पर झंडा फहराने के लिए निकल पड़ें. इस दौरान आजादी के मतवालों के मन में यह भी चल रहा था कि इस दौरान ज्यादा लोगों की शहादत भी न हो और लोग कामयाब भी हो जाएं. इसी मंशा के साथ इन मतलबालों ने 11 अगस्त के दिन को चुना और समय भी चुना दोपहर का. इन इन सपूतों ने अपने साथियों को कहा कि हम खाना खा कर आते हैं और निकल पड़े अपने तिरंगा को सबसे ऊंचाई पर लहराने को. इन मतवालों ने जो स्थान चुना था वह था पटना सचिवालय जहां पर बिहार के लालों ने अपना तिरंगा लहराया. बता दें कि उस समय पटना के जिलाधिकारी W G आर्थर थे. इसी जिलाधिकारी के आदेश पर आजादी के इन मतवालों पर गोलियां बरसाई गई थी. इस दौरान अंग्रेजों ने करीब 13 से 14 राउंड गोलियां चलाई गई थी.

सचिवालय पर तिरंगा फहराते समय पहले राममनोहर राय सेमिनरी के छात्र रामानंद सिंह के हाथों में तिरंगा था और पहली गोली भी इन्हें ही लगी थी. ये वहीं पर वीरगति को प्राप्त हुए इसके बाद तिरंगा पटना ही स्कूल गर्दनीबाग के राजेंद्र सिंह के हाथों में था अगली गोली राजेंद्र सिंह को लगी. भारत माता की जय कहते हुए वे जमीन पर गिर गए. अब तिरंगा बीएन कॉलेज के छात्र जगपति कुमार ने अपने हाथों में थामा और आगे बढ़ गए. इस दौरान तक झंडा फहराने से कुछ ही कदम की दूरी पर थे. इस दौरान जगपति को एक साथ तीन गोलियां लगी और जगपति वहीं पर शहीद हो गए. अब तिरंगा पटना कॉलेजिएट के छात्र सतीश प्रसाद झा ने तिरंगा थाम लिया. लेकिन इन्हें भी अंग्रेजों की गोली लग गई. अब तिंरगा रोममोहन राय सेमिनरी के छात्र उमाकांत के पास था इनकी उम्र मात्र 15 साल की थी. और तिरंगा इनके हाथ में था. और लक्ष्य से मात्र कुछ कदम दूर थे. लेकिन वे आगे बढ़ते गए. उमाकांत तक गोली पहुंच पाती तिरंगा सचिवालय में लहरा रहा था. और उमाकांत जमीन पर गिर चुके थे. अंग्रेजों की गोलियों से बिहार के सात लाल उमाकांत प्रसाद सिंह, रामानंद सिंह, सतीश चंद्र झा, जगपति कुमार, देवीपद चौधरी, राजेंद्र सिंह और राम गोविंद सिंह शहीद हो गए. इनके शहादत के कुछ ही साल के बाद देश आजाद हुआ… आज बिहार के साथ ही पूरा देश अपने इन बेटों पर नाज करता है. और कहता है कि इन वीर सपूतों की यादें हमेशा याद की जाएंगी…

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